सुल्तानपुर। एक राज्य-एक आरआरबी के तहत प्रदेश में ग्रामीण बैंकों के यूपी ग्रामीण बैंक में विलय के तहत शनिवार को शुरू हुई सॉफ्टवेयर अपग्रेड करने व डाटा ट्रांसफर करने की प्रक्रिया सोमवार को भी जारी रही। इस प्रक्रिया के कारण जिले में स्थित ग्रामीण बैँकों की 79 शाखाओं में लेनदेन ठप होने से करीब 12 लाख ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। तीन दिन से जारी इस प्रक्रिया के देर रात तक पूर्ण होने और मंगलवार को बैंक की सेवाएं सुचारू होने का अधिकारियों ने दावा किया है।
केंद्र सरकार के सीधे स्वामित्व में आने के बाद बड़ौदा यूपी ग्रामीण बैंक का नाम बदल कर वित्त मंत्रालय ने उप्र ग्रामीण बैंक कर दिया था। इस बैंक का शेयर बढ़ने पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने ग्रामीण बैंक में प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक व आर्यावर्त बैंक को पिछले माह मर्ज कर दिया गया। उप्र ग्रामीण बैंक के जिला कोऑर्डिनेटर विष्णु मोहन ने बताया कि ग्रामीण बैंकों के मर्ज होने के बाद माइग्रेशन के कार्य के लिए ग्राहकों का लेन-देन प्रदेश भर की शाखाओं में बंद चल रहा है। इसमें जिले की 79 शाखाएं भी शामिल हैं। माइग्रेशन कार्य में तीनों बैंकों का एक सीबीएस (कोर बैंकिंग सिस्टम) तैयार किया जा रहा है। इन्हें एक प्लेट फाॅर्म पर लाया जा रहा है। इसकी वजह से करीब पांच करोड़ रुपये रोजाना का लेन-देन बंद है। जिले के ग्रामीण क्षेत्राें में अधिकांश लोगों के ग्रामीण बैंकों से जुड़े होने से ग्राहकों के कार्य बाधित हो गए हैं। खासकर छोटे तबके के ग्राहक परेशान हैं। मनरेगा मजदूरी समेत अन्य सरकारी योजनाओं की धनराशि सीबीएस के जरिये सीधे बैंक खाते में जाने की व्यवस्था से लाभार्थी भी परेशान हैं। सोमवार को भी बैंक शाखाओं में पहुंचने वाले ग्राहकों को वापस होना पड़ा।
इन ग्रामीण बैंकों का हुआ है विलय
यूपी ग्रामीण बैंक
बड़ौदा यूपी ग्रामीण बैंक
आर्यावर्त बैंक
79 शाखाएं हैं ग्रामीण बैँकों की जिले में
5 करोड़ रुपये प्रतिदिन होता है लेनदेन
12 लाख ग्राहक जुड़े हैं ग्रामीण बैंक से
इनसेट
आज से पूर्ववत संचालित होंगी बैंक शाखाएं
उप्र ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक एमआर झा ने बताया कि जिले में करीब 12 लाख ग्राहक हैं। पूरे प्रदेश में कार्य चल रहा है। मंगलवार से बैंक की सभी शाखाएं पूर्ववत संचालित हो जाएंगी।