सुल्तानपुर। छह साल तक मुफ्त डिजिटल भुगतान के बाद अब यूपीआई के बड़े लेनदेन पर शुल्क की नई व्यवस्था से कारोबारियों में उबाल है। 15 अक्तूबर से 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर 0.4 फीसदी एमडीआर लगेगा। साथ ही 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर शुल्क अधिकतम 300 रुपये होगा।
जिले के व्यापारियों का कहना है कि इससे उनके सीमित मुनाफे पर असर पड़ेगा। मध्यम दुकानदारों के लिए यह रकम अतिरिक्त बोझ बनेगी। व्यापारिक संगठनों ने इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने या शुल्क वापस लेने की मांग उठाई है। जिन छोटे व्यापारियों की यूपीआई से मासिक प्राप्ति एक लाख रुपये तक है, वे इस प्रस्तावित एमडीआर से बाहर रहेंगे। रेलवे, ईंधन और कुछ जरूरी सेवाओं में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर पांच रुपये का तय शुल्क होगा। यह शुल्क ग्राहक से वसूलने की अनुमति नहीं होगी।
संगठनों से परामर्श की मांग फोटो 9
संयुक्त व्यापारी सुरक्षा उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष आलोक सागर ने 2,000 रुपये की सीमा खत्म कर सभी छोटे व्यापारियों के लिए शून्य शुल्क लागू करने की मांग की। उन्होंने शुल्क लागू करने से पहले संगठनों से परामर्श करने पर जोर दिया।
कारोबारियों की बढ़ी चिंता
उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष मनीष साहू ने कहा कि यह प्रस्ताव छोटे कारोबारियों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है। उन्होंने चेतावनी दी कि व्यापारी हित में फैसला न होने पर विरोध होगा।
युवाओं और छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा असर
ऑल इंडिया गोल्ड स्मिथ फेडरेशन के जिलाध्यक्ष गोपालजी सोनी ने आशंका जताई कि यूपीआई लेनदेन पर शुल्क से डिजिटल भुगतान की रफ्तार प्रभावित होगी। इसका असर खासकर छोटे और युवा कारोबारियों पर पड़ेगा, जो ऑनलाइन भुगतान पर निर्भर हैं।
कारोबार में बढ़ेगी परेशानी
उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के नगर अध्यक्ष आनंद पांडेय ने कहा कि थोक कारोबार से लेकर आम ग्राहक तक पर इसका असर होगा। उन्होंने कहा कि शुल्क लगाने से कारोबार में परेशानी बढ़ेगी और नकदी लेनदेन को बढ़ावा मिल सकता है।