सुल्तानपुर। डाॅ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में अनुमोदन के नाम पर फर्जीवाड़ा चल रहा है। फर्जी अभिलेखों के आधार पर हिंदी के शिक्षक को अंग्रेजी विषय विशेषज्ञ के तौर पर एक काॅलेज ने नियुक्ति दे दी। इसकी भनक शिक्षक को भी नहीं हुई। जब अपनी नियुक्ति कराने शिक्षक दूसरे काॅलेज पहुंचा तो वेबसाइट पर नाम व कोड फीडिंग के दौरान खुलासा हुआ कि उसकी नियुक्ति दो साल पहले ही एक काॅलेज में अंग्रेजी विषय विशेषज्ञ के रूप में हो चुकी है, इसलिए एक साथ दो काॅलेज एलॉट नहीं हो सकते।
दरअसल, जिले के अझुई में रफत उल्लाह महाविद्यालय है, जिसका कोड 838 है। काॅलेज प्रबंधन ने विश्वविद्यालय से साठगांठ कर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर मवई खुर्द अयोध्या निवासी डाॅ. संजीत कुमार को बतौर अंग्रेजी प्रवक्ता नियुक्ति दे दी और शिक्षक को इसकी भनक तक नहीं लगी। हैरानी की बात यह है कि डाॅ. संजीत कुमार हिंदी विषय से एमए, पीएचडी हैं और अंग्रेजी से उनका कोई सरोकार ही नहीं है। उन्हें काॅलेज के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब शिक्षक डाॅ. संजीत अपनी नियुक्ति कराने दूसरे महाविद्यालय पहुंचे। जब उनके कागजात आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किए गए तो पता चला कि उनके शैक्षिक कागजात अझुई स्थित रफत उल्लाह महाविद्यालय में बतौर अंग्रेजी प्रवक्ता के रूप में लगे हैं। अब संजीत कुमार अपना अनुमोदन रद्द कराने विश्वविद्यालय के चक्कर काट रहे हैं। (संवाद)
ऐसे होना चाहिए अनुमोदन
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों और निजी प्रबंधतंत्र के गठजोड़ को तोड़ने के लिए सभी विश्वविद्यालयाें को अपने संबद्ध कॉलेजों के शिक्षको की सूची वेबसाइट पर अपलोड करने की गाइडलाइन जारी की है। नियम है कि प्रबंधतंत्र के आवेदन पर विश्वविद्यालय एक पैनल गठित करता है। पैनल साक्षात्कार कर इनका चयन करता है। कुलपति की लिखित अनुमति पर कुलसचिव संबंधित शिक्षक व प्राचार्य का अनुमोदन पत्र निर्गत करता है। इसी अनुमोदन पत्र के आधार पर महाविद्यालय शिक्षक व प्राचार्य को नियुक्ति प्रदान करते हैं।
हमारी कोई गलती नहीं है : प्रबंधक
रफत उल्लाह महाविद्यालय के प्रबंधक इकरार अहमद ने बताया कि शिक्षक संजीत कुमार के सारे शैक्षिक कागजात हमारे पास सुरक्षित हैं। वह ऐसा आरोप क्यों लगा रहे हैं, समझ से परे है। हमारी कोई गलती नहीं है। विश्वविद्यालय की जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा।
कराई जाएगी जांच : कुलपति
डाॅ. राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. प्रतिभा गोयल ने बताया कि यह गंभीर मामला है, इसकी जांच कराई जाएगी, अगर मामला सही मिला तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।