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अमहट के जुलूस में आकर्षण का केंद्र रहा दुनिया का सबसे ऊंचा अलम

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सुल्तानपुर। शहर से सटे अमहट स्थित हुसैनिया नौतामीर में मंगलवार की रात मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस के बाद 18 बनी हाशिम के शबीह ताबूत का जुलूस निकाला गया। जुलूस में विश्व का सबसे ऊंचा 110 फीट का अलम आकर्षण का केंद्र रहा।
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अंजुमन असगरिया अमहट की तरफ से इस बार भी शब्बेदारी व 18 अवलादे अबू तालिब (अलैह सलाम) के शबीह ताबूत के मौके पर अलम मुबारक का अनोखे अंदाज में निर्माण कराया गया।
यह दुनिया के सबसे ऊंचे अलम के नाम से प्रसिद्ध है। सबसे पहले हुसैनिया नौतामीर में मंगलवार की रात मजलिस आयोजित हुई। मजलिस को मौलाना मोहम्मद हुसैन हुसैनी मुजफ्फरनगर ने खेताब किया।
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उन्होंने हजरत इमाम हुसैन (अ.स) के उस छह माह के बच्चे का मसायब पढ़ा, जो तीन दिन का भूखा और प्यासा था। जिसे हुसैन मैदान में लेकर आए और उस प्यासे बच्चे के लिए यजीदी फौज से पानी मांगा लेकिन जालिमों ने उस नन्हें बच्चे के गले पर तीर मारकर शहीद कर दिया।
उसी की याद में गहवारा ऽझूलाऽ निकाला गया और रात भर शब्बेदारी हुई। इसमें मुकामी व बाहरी अंजुमनों ने नौहा मातम किया। बुधवार को सुबह 18 बनी हाशिम के शबीह ताबूत का जुलूस निकाला गया।
यह जुलूस हुसैनिया नौतामीर से उठकर हुसैनिया शेखखानी पर पहुंचकर खत्म हुआ। जुलूस के दौरान मौलाना मुशीर अब्बास, मौलाना शारिब अब्बास अकबरपुरी, मौलाना नदीम रजा व मौलाना जीशान हैदर ने तकरीर की। अनीस जायसी ने संचालन किया।
दुनिया का सबसे ऊंचा 110 फीट का अलम लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। शब्बेदारी में अलम की जियारत कराई गई। इसमें जिले के अलावा अन्य जनपदों के लोगों ने हिस्सा लिया।
हुसैनी शिया वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष हैदर अब्बास खान बताते हैं कि जिस तरीके से एक राष्ट्र का झंडा उस देश की पहचान करवाता है, उसी तरीके से अलम हमारा इस्लामी झंडा है। इसको करबला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन (अ.स) के कमांडर इन चीफ हजरत अब्बास ने बुलंद करके इंसानियत को बचाकर अमन शांति का पैगाम दिया था।
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