सुल्तानपुर। कोरोना महामारी की वजह से बाधित हुई परिषदीय विद्यालयों के बच्चों की पढ़ाई अब पाठ्य पुस्तकें मिलने के बाद शुरू हो सकेगी। शासन के निर्देश पर विद्यालयों में सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का पालन करते हुए छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को पाठ्य पुस्तकें दी जाएंगी।
जिले के विद्यालयों में 30 सितंबर 2019 की छात्र संख्या के मुताबिक 2,63,995 बच्चों के लिए किताबों का क्रय आदेश जारी हुआ है। इसके मुताबिक 18,37,235 पाठ्य पुस्तकें/कार्य पुस्तिकाएं निशुल्क वितरित होनी हैं। पाठ्य पुस्तकों की पहली खेप के रूप में करीब 15 फीसदी किताबें जिले को प्राप्त हो गई हैं।
शासन के निर्देश पर परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों, मदरसों में अध्ययनरत कक्षा एक से आठ तक के सभी बालक-बालिकाओं को पाठ्य पुस्तकों का निशुल्क वितरण होना है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सभी खंड शिक्षाधिकारियों को पत्र जारी कर कहा है कि विद्यालय वार छात्र संख्या के आधार पर पाठ्य पुस्तकें वितरित की जानी हैं। इसका विवरण तैयार कर विकास खंड स्तर पर एक को पाठ्य पुस्तक प्रभारी तथा एक को सहायक नामित कर उसका नाम और मोबाइल नंबर सर्वशिक्षा अभियान कार्यालय में उपलब्ध कराएं।
बीआरसी पर पाठ्य पुस्तकों के भंडारण एवं वितरण की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाय। निशुल्क पाठ्य पुस्तक की ढुलाई के लिए निविदा विद्यालय स्तर तक हुई है। अत: बीआरसी की ओर से विद्यालयों का रूट चार्ट तैयार किया जाय। सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का अनुपालन करते हुए प्रधानाध्यापक विद्यालय में पुस्तकें प्राप्त होने के अगले दिन अभिभावकों को छोटे-छोटे समूह में बुलाकर पाठ्य पुस्तकें वितरित कराएंगे। विद्यालय परिसर में तीन से अधिक अभिभावक नहीं बुलाए जाएंगे।
निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण वास्तविक नामांकन के आधार पर किया जाएगा। इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर प्रधानाध्यापक सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। यदि किसी विद्यालय में आपूर्ति की गई पाठ्य पुस्तकों से कम छात्रों का नामांकन होता है तो उस विद्यालय के हेडमास्टर बची हुई पाठ्य पुस्तकों को न्याय पंचायत संसाधन केंद्र पर जमा कराएंगे।
इसी प्रकार यदि किसी विद्यालय में निशुल्क पाठ्य पुस्तकों से अधिक छात्र संख्या होती है तो वह न्याय पंचायत संसाधन केंद्र से बची हुई संख्या के आधार पर पाठ्य पुस्तकें वितरित करेंगे।