बाराबंकी। सरकारी विद्यालयों को अक्सर लोग अव्यवस्था, जर्जर भवन और संसाधनों की कमी से जोड़कर देखते हैं। लेकिन जिले के ग्रामीण इलाकों में संचालित दस सरकारी विद्यालयों ने इस अवधारण को गलत साबित कर दिया है। इन विद्यालयों ने शासन द्वारा तय कायाकल्प के 19 पैमानों पर अपने को खरा साबित करते हुए न सिर्फ जिला स्तर पर, बल्कि प्रदेश भर में एक अलग पहचान बनाई है। इनमें शहरी क्षेत्र का कोई भी विद्यालय शामिल नहीं है।
बीएसए संतोष देव पांडेय ने बताया कि शिक्षकों की मेहनत से ही यह उपलब्धि संभव हो सकी है। इस लिए शासन स्तर से भी इन विद्यालयों की फोटोग्राफ जारी करते हुए उन्हें अन्य स्कूलों के लिए रोल मॉडल बताया गया है। कायाकल्प से बहतर बने स्कूलों में निंदूरा ब्लॉक का प्राथमिक विद्यालय घुंघटेर और प्राथमिक विद्यालय बसारा, हरख ब्लॉक का प्राथमिक विद्यालय गुलरिहा और प्राथमिक विद्यालय हरख प्रथम व देवा का प्राथमिक विद्यालय पवैयाबाद शामिल हैं।
इसी तरह सूरतगंज का प्राथमिक विद्यालय सूरतगंज प्रथम, सिरौली गौसपुर का प्राथमिक विद्यालय हमीनपुर मजरे सैदनपुर, त्रिवेदीगंज का उच्च प्राथमिक विद्यालय दयालगंज, सिद्धौर ब्लॉक का प्राथमिक विद्यालय भुनई रुद्र और हैदरगढ़ का प्राथमिक विद्यालय सिधियावां भी इस सूची में शामिल है। कुछ साल पहले तक इन स्कूलों में टूटे फर्नीचर, गंदगी, पानी की कमी और जर्जर कमरे दिखते थे। अब स्थिति यह है कि बच्चे स्मार्ट क्लास, टाइल लगे कमरे, साफ शौचालय और सुरक्षित पेयजल की सुविधा में पढ़ाई कर रहे हैं।
साबित हो गया कि बदलाव संभव है।
बीएसए संतोष देव पांडये ने बताया कि यह उपलब्धि सिर्फ प्रशासनिक आदेश का परिणाम नहीं, बल्कि शिक्षकों की मेहनत और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए की गई पहल का नतीजा है। अगर दस विद्यालय यह कर सकते हैं, तो पूरा जिला भी कर सकता है। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बाकी स्कूलों को उसी दिशा में बढ़ाया जाए।