गौरीगंज(अमेठी)। हाईकोर्ट के आदेश पर विशेष अनुसंधान दल उत्तर प्रदेश (एसआईटी) ने विशिष्ट बीटीसी/बीटीसी के माध्यम से परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों के अभिलेखों की जांच शुरू कर दी है। एसआईटी ने बेसिक शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों के माध्यम से बीएसए को पत्र भेजकर ऐसे सभी शिक्षकों के संबंध में संपूर्ण जानकारी मांगी है जिन्हें वर्ष 2007 से 2010 के मध्य नियुक्ति मिली थी। जांच के दायरे में सिर्फ वे शिक्षक हैं जिन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से बीएड की डिग्री/उपाधि हासिल की है। इससे एसआईटी की जांच से दायरे में आने वाले शिक्षकों में हड़कंप मचा है।
उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने बीते दिनों सुनील कुमार बनाम डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था। जारी आदेश में याची की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब पाने के लिए पूरे मामले की जांच विशेष अनुसंधान दल उत्तर प्रदेश (एसआईटी) से कराने को कहा था। कोर्ट की ओर से जारी आदेश मिलने के बाद एसआईटी ने बेसिक शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों के माध्यम से बीएसए आनंद कुमार पांडेय को पत्र भेजकर 2007-2010 के मध्य विशिष्ट बीटीसी/बीटीसी के आधार पर परिषदीय विद्यालयों में चयनित उन सभी शिक्षकों के संबंध में संपूर्ण जानकारी तत्काल मांगी है जिन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से बीएड किया है।
जारी पत्र में शिक्षकों का नाम, पिता का नाम, स्थाई पता, अस्थाई पता और स्कूल का नाम और ब्लॉक पूछा है। एसआईटी की ओर से जांच शुरू होने की जानकारी मिलने के बाद इसके दायरे में आने वाले शिक्षकों में हड़कंप मचा है। हालांकि जिले में इस विश्वविद्यालय के कितने डिग्री/उपाधि धारक शिक्षक हैं, इसका पता नहीं चल सका है।
मांगी गई सूचना : बीएसए
बेसिक शिक्षा अधिकारी आनंद कुमार पांडेय ने कहा कि एसआईटी द्वारा उच्चाधिकारियों के माध्यम से भेजा गया पत्र मिला है। पत्र में मांगी गई जानकारी के आधार पर सभी बीईय्ओ से दायरे में आने वाले शिक्षकों की संपूर्ण जानकारी अंग्रेजी भाषा में सीडी, माइक्रोसॉफ्ट एक्सल में सॉफ्ट कॉपी व हार्डकॉपी उपलब्ध कराने को कहा गया है।