परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में चल रही 15000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में जिले को आवंटित 300 सीटों के सापेक्ष 296 अभ्यर्थियों की नियुक्ति को निरस्त करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। न्यायालय ने बीएसए के नियुक्ति स्थगित करने एवं निरस्त करने संबंधी दोनों आदेशों पर रोक लगाते हुए 22 फरवरी को जवाब तलब किया है।
जिले को आवंटित 300 सीटों के सापेक्ष दो चरणों में काउंसलिंग प्रक्रिया आयोजित हुई थी। 26 अक्तूबर एवं छह नवंबर को काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले अभ्यर्थियों में चयनित अभ्यर्थियों को सात नवंबर को विकल्प दिया गया था। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से नौ नवंबर को 296 अभ्यर्थियों को सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति पत्र दे दिया गया। कई अभ्यर्थियों ने इसी दिन अपने आवंटित विद्यालयों में जॉइनिंग भी दे दी। नियुक्ति पत्र वितरित किए जाने की जानकारी जब बेसिक शिक्षा परिषद सचिव को मिली तो उन्होंने बीएसए से जवाब तलब कर लिया।
सचिव ने कहा कि सभी बीएसए को काउंसलिंग कराने एवं चयनित अभ्यर्थियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए थे न कि नियुक्ति पत्र वितरित करने के। मामले में नोटिस मिलने के बाद बीएसए रमेश यादव ने 10 नवंबर को सभी नियुक्ति पत्रों को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया था। इस मामले पर अभ्यर्थी अंकित सिंह एवं अन्य ने उच्च न्यायालय में अपील की। इसी दौरान 14 दिसंबर को बीएसए की ओर से सभी नियुक्ति पत्रों को निरस्तीकरण का आदेश जारी किया गया।
जिस पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बीएसए के नियुक्ति पत्र स्थगित करने एवं निरस्तीकरण पर रोक लगाते हुए 22 फरवरी को जवाब तलब किया है। इस मामले में प्रभारी बीएसए ओंकार सिंह ने कहा कि उच्च न्यायालय का आदेश मिलने के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी।