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आंदोलन में गए गुरुजी स्कूलों में लटके ताले

Wed, 16 Mar 2016 09:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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आंदोलन में गुरुजी, स्कूलों में ताले - फोटो : अमर उजाला
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जिले में परिषदीय स्कूलों की बदरंग तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। परिषदीय स्कूलों के गुरुजन लखनऊ में होने वाले धरना-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए बिना अवकाश ही चले गए। यह हाल तब है जब इन दिनों स्कूलों में वार्षिक परीक्षा चल रही है। गुरुजनों की अनुपस्थिति  से जिले के एक चौथाई स्कूलों में ताला ही नहीं खुला जबकि कुछ में दूसरे स्कूलों के शिक्षकों ने परीक्षा कराई।
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जिले में कुल परिषदीय विद्यालयों की संख्या 1,769 है। इनमें 1,337 प्राथमिक व 432 उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। शासन के आदेश पर बीते 14 मार्च से इन विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षा चल रही है। परीक्षा की समय सारिणी घोषित होने के बाद उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर जिला संघ के पदाधिकारियों ने बीते दिनों बीएसए आनंद कुमार पांडेय को ज्ञापन देकर 16 मार्च को शिक्षकों का सामूहिक अवकाश स्वीकृत किए जाने का अनुरोध किया था। शिक्षक नेताओं का कहना था कि 16 मार्च को उन्हें लखनऊ में आयोजित धरना-प्रदर्शन में शामिल होना है।

इसलिए वे स्कूल बंद रखेंगे। हालांकि बीएसए ने शिक्षक संघ के पदाधिकारियों को सामूहिक अवकाश देने से सीधे तौर पर मना करते हुए परीक्षा कराने को कहा था। बीएसए की ओर से अवकाश स्वीकृत नहीं करने के बावजूद बुधवार को जिले के करीब 25 प्रतिशत परिषदीय स्कूलों में ताला लटका रहा। यहां तैनात शिक्षकों के बारे में बताया गया कि वे संघ की ओर से लखनऊ में आयोजित धरना-प्रदर्शन में शामिल होने लखनऊ गए हैं। जिले का कोई भी ऐसा ब्लॉक ऐसा नहीं रहा जहां बुधवार को शत-प्रतिशत विद्यालय खुले हों और बच्चों की परीक्षा ली गई हो।
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सबसे खराब स्थिति जिला मुख्यालय की गौरीगंज तहसील केब्लॉक गौरीगंज, जामों व शाहगढ़ तथा अमेठी तहसील के ब्लॉक भेटुआ की रही। गौरीगंज में जहां 188 परिषदीय स्कूलों में मात्र 40, जामों में 144 में 50 स्कूल ही खुले मिले। शाहगढ़ में 23, मुसाफिरखाना में आठ, भादर के 120 विद्यालयों में प्राथमिक स्कूल अग्रेसर, प्राथमिक स्कूल राघवपुर, प्राथमिक स्कूल रतापुर व उच्च प्राथमिक स्कूल रतापुर में परीक्षा नहीं हुई। भादर के प्राथमिक स्कूल भैंसहा, प्राथमिक स्कूल गनीपुर व प्रथामिक स्कूल विशुनदासपुर सहित जिले के एक सैकड़ा विद्यालय ऐसे रहे, जहां संबंधित ब्लॉकों के बीईओ ने दूसरे विद्यालयों के शिक्षकों को भेजकर आए हुए बच्चों की परीक्षा ली।
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