सुल्तानपुर। जिले में क्षय रोग पर काबू पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बीपाल एम से इलाज शुरू किया है। इसमें बेडाक्विलिन, प्रीटोमैनिड, लाइनजोलिड और मोक्सीफ्लोक्सासिन नाम की चार दवाएं शामिल हैं।
मौजूदा समय में 14 मरीजों का उपचार इन दवाओं से चल रहा है। पहले जटिल टीबी मरीजों का उपचार नौ से 27 महीने तक चलता था, लेकिन बीपाल एम से सिर्फ छह माह में मरीज को बीमारी से मुक्ति मिल जाएगी।
जून माह में शुरू इस विधि से अब टीबी के मरीजों कोे सहूलियत मिलेगी। वरिष्ठ पर्यवेक्षक सुरेश कुमार ने बताया कि इस किट के मरीजों को इलाज के दौरान बड़ी जिम्मेदारी दी जाती है। अक्सर मरीज दवाओं के सेवन में लापरवाही बरतते हैं। इसके लिए परिजनों को भी सचेत किया जाता है, बीच में दवा बंद कर देने से पूरा इलाज बेकार हो जाता है। इसके लिए मरीज की उम्र 14 साल से अधिक होनी चाहिए।
गर्भवती महिला व बच्चे को दूध पिलाने वाली मां न हो। टीबी मरीजों को हर महीने पांच सौ रुपये पौष्टिक आहार के लिए दिया जाता है। जांच से लेकर दवाएं मुक्त दी जाती हैं।
छह माह में मरीज को मिलेगी टीबी से मुक्ति बीपाल एम एक शॉर्ट नाम है। जिसमें चार दवाओं का नाम जुड़ा है। छह महीने की दवा का किट एक साथ दी जाती है। चिकित्सकों की सलाह पर इन दवाओं का सेवन कराया जाता है। जिले में जून से इस किट से मरीजों का इलाज किया जा रहा है। मौजूदा समय में 14 मरीज यह दवाएं खा रहे हैं। इससे लंबे समय का इलाज अब छह महीने में ही पूरा हो जाएगा।
डॉ. आर के कनौजिया, जिला क्षय रोग अधिकारी