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Sultanpur News: विजेथुआ महोत्सव में स्वामी रामभद्राचार्य ने सुनाई वाल्मीकि रामायण

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विजेथुआ धाम में कथा सुनाते स्वामी रामभद्राचार्य महाराज। - फोटो : विजेथुआ धाम में कथा सुनाते स्वामी रामभद्राचार्य महाराज।
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सूरापुर। राम-सीता दोनों ब्रह्म हैं। हमारे दर्शन में सीताराम अद्वैत हैं। एक ही भगवान दो रूपों में प्रकट हुए, राम बनकर अयोध्या में और सीता बनकर मिथिला में। ये बातें चित्रकूट तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य ने कहीं। वे शनिवार को दूसरे दिन विजेथुआ धाम में आयोजित विजेथुआ महोत्सव में वाल्मीकि रामायण कथा सुना रहे थे।
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उन्होंने बताया कि वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड में सीता कहती हैं कि भगवान राम परमात्मा हैं। मुझसे प्रेम करने के कारण उन्होंने पत्नी रूप में मुझे स्वीकारा है। स्वामी रामभद्राचार्य ने ‘तल्फत मेरे प्रान राम कब दर्शन देहिहो, नील पयोद समान राम कब दर्शन देहिहो’ भजन गाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। व्यास गद्दी से उन्होंने बताया कि मैंने कई कथाएं की हैं। यह श्रीराम कथा शृंखला की मेरी 1408 वीं कथा है।
भगवान राम ने 39 वर्षों में संपूर्ण कार्य पूर्ण कर दिया। भगवान राम का 12 वर्ष में विवाह, 25 वें वर्ष में 14 साल का वनवास और 39 वर्ष में रावण वध कर राजा बने। कथा के समापन पर आयोजक विवेक तिवारी ने व्यास पीठ का पूजन किया। इस मौके पर विधायक राजेश गौतम, डाॅ. रत्नेश तिवारी, आनंद द्विवेदी, प्रभुदत्त द्विवेदी, राजमणि वर्मा, फतेह बहादुर सिंह समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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