किसानों की नारेबाजी, नोकझोंक और अधिकारियों के साथ 28 घंटे चली लंबी तकरार के बाद किसानों पर राहत बरसी है। अब किसानों से सरकारी दर 400 रुपये प्रति क्विंटल पर ही गन्ना खरीद होगी और गन्ने की तौल सहकारी चीनी मिल में ही होगी। भाड़ा खर्च के नाम पर किसानों से कटौती नहीं की जाएगी। इतना ही नहीं, करीब 3.68 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया। इस घोषणा के बाद किसानों का आंदोलन खत्म हुआ। बृहस्पतिवार सुबह से गन्ने की तौल शुरू कर दी गई, जो रात नौ बजे तक चली। आंदोलन खत्म होने के बाद मिल प्रशासन ने राहत की सांस ली है।
किसान सहकारी चीनी मिल में मंगलवार शाम छह बजे से किसानों का आंदोलन शुरू हुआ था। बुधवार को दूसरे दिन किसानों को समझाने के लिए अधिकारियों ने भरसक प्रयास किया, लेकिन देर शाम तक बात नहीं बन सकी। मिल में गन्ना बेचने के लिए आए किसान ठंड में ही विरोध प्रदर्शन पर डटे रहे।
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बुधवार देर रात करीब 8:00 बजे जॉइंट केन कमिश्नर डॉ. आरसी पाठक, जिला गन्ना अधिकारी राजेश्वर यादव, सहकारी चीनी मिल की जीएम अंजली गंगवार, महाप्रबंधक गन्ना हैदरगढ़ धर्मेश मल्होत्रा, रीजनल हेड एसएन पांडेय, संचालक मंडल के उपसभापति प्रतिनिधि उमेश प्रताप सिंह और किसानों के बीच लंबी बैठक चली। गन्ने के मूल्य और अन्य मांगों को लेकर हैदरगढ़ चीनी मिल के अधिकारियों व किसानों के बीच काफी बहस हुई।
बैठक बेनतीजा होते देख सहकारी चीनी मिल की जीएम अंजली गंगवार ने प्रबंध निदेशक लखनऊ ईशा दुहान को मामले से अवगत कराया। प्रबंध निदेशक की दखल के बाद किसानों के गन्ने की खरीद के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल दाम तय किया गया। यही नहीं, चीनी मिल से जुड़े किसानों ने जितनी प्रजाति के गन्ने की बोआई की है, सभी का दाम 400 रुपये प्रति क्विंटल बेचे जाने पर सहमति बनी।
बृहस्पतिवार सुबह नौ बजे से किसान सहकारी चीनी मिल के गन्ना यार्ड में हैदरगढ़ चीनी मिल से आए तौल कांटे को स्थापित किया गया। अधिकारियों की मौजूदगी में गन्ने की तौल शुरू करा दी गई।
3.68 करोड़ रुपये का हुआ भुगतान
चीनी मिल पर किसानों के धरना-प्रदर्शन के बाद मिल प्रशासन बैकफुट पर आ गया। अभी तक किसानों को फूटी कौड़ी भुगतान नहीं करने वाली चीनी मिल बुधवार को 3.68 करोड़ रुपये का भुगतान गन्ना किसानों के खाते में भेज दिया। यह भुगतान 12 से 23 दिसंबर तक की गन्ने की अपूर्ति पर किया गया है। अब भी चीनी मिल पर गन्ना किसानों का तकरीबन 15 करोड़ रुपये बकाया है।
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मिल बंदी पर बोले किसान
किसान सहकारी चीनी मिल में पांच दिनों से गन्ना तौल कराने आए किसानों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। सोनारा गांव निवासी किसान रामसिंह पटेल ने बताया कि छह दिन पूर्व चीनी मिल पर गन्ना लेकर आए थे। मिल के अचानक बंद होने से परेशानी का सामना करना पड़ा।
बलरामऊ गांव निवासी तफसील अहमद ने कहा कि मिल के अधिकारियों व कर्मचारियों ने चीनी मिल का बंटाधार कर दिया। अब हैदरगढ़ आवंटित चीनी मिल को गन्ने की तौल कराने के बाद राहत मिली है।
गन्ना किसान अमित वर्मा कहते हैं कि पांच दिन से चीनी मिल पर गन्ना लेकर आए हैं। अभी तक तौल नहीं हो सकी है। जैशराज पाल ने बताया कि तौल की गति काफी धीमी होने से परेशानी हो रही है। चीनी मिल पर कम से कम दो तौल कांटे की जरूरत है।
गन्ना किसानों की समस्याओं का समाधान कर दिया गया है। चीनी मिल के गन्ना यार्ड में किसानों के गन्ने की तौल कराकर हैदरगढ़ चीनी मिल में पेराई के लिए भेजा जा रहा है।
अंजली गंगवार, महाप्रबंधक सहकारी चीनी मिल