जिले की इकलौती किसान सहकारी चीनी मिल का पहिया आखिर 68 घंटे बाद डोल गया। तकनीकी खराबी दूर करने के बाद मिल प्रबंधन ने गन्ने की पेराई शुरू कर दी। मिल के मेंटेनेंस में करीब पांच लाख रुपये का खर्च आया है। चार दिन तक गन्ना की पेराई बंद रहने से किसानों को परेशानी उठानी पड़ी। गन्ना पेराई शुरू होने से किसानों ने राहत की सांस ली है।
किसान सहकारी चीनी मिल में पेराई सत्र 2016-17 में 15 लाख क्विंटल गन्ना पेराई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आए दिन तकनीकी खराबी और अन्य वजहों से मिल में गन्ना पेराई बाधित रहती है। मिल में अभी तक लक्ष्य के सापेक्ष चार लाख 35 क्विंटल गन्ना की पेराई हो सकी है। बीते कई दिनों से मिल में गन्ना की पेराई सही ढंग से नहीं हो पाने पर मिल प्रबंधन ने पेराई बंद कराकर मिल की साफ-सफाई कराने का निर्णय लिया था।
बीते शुक्रवार की रात करीब आठ बजे से मिल में गन्ना की पेराई बंद करा दी गई थी। चीनी मिल के कर्मचारी और तकनीकी स्टाफ से जुड़े लोग शुक्रवार की रात में ही मिल की साफ-सफाई करने में जुट गए थे। सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी कर्मचारी मिल के मेंटेनेंस में लगे रहे। इस दौरान गन्ना कटर, बिजली के उपकरण और बैरिंग समेत कई अन्य कल-पुर्जों को बदलकर नया लगाया गया।
तकनीकी खराबी दूर होने और मिल की साफ-सफाई का कार्य पूरा होने के बाद सोमवार की शाम करीब चार बजे से गन्ना की पेराई शुरू करा दी गई। 68 घंटे तक मिल में गन्ना की पेराई बंद रहने से किसानों को परेशानी उठानी पड़ी। कई इलाकों में किसानों के खेतों में काटा गया गन्ना सूख रहा था। चीनी मिल प्रबंधन की मानें मिल के मेंटेनेंस में करीब पांच लाख रुपये का खर्च आया है। करीब 68 घंटे बाद मिल में गन्ना पेराई शुरू होने पर किसानों ने राहत की सांस ली है।