सुल्तानपुर। गांव की महिलाओं को छोटी जरूरतों के लिए अब साहूकारों या बैंकों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं अपने गांव में ही महज एक प्रतिशत ब्याज पर ऋण लेकर छोटे कारोबार को आगे बढ़ा सकेंगी। पान-चाय की दुकान हो या परचून की दुकान, दूध बिक्री का काम हो या परिवार की तत्काल जरूरत, समूह की पूंजी महिलाओं के काम आएगी।
महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की ओर से 94 स्वयं सहायता समूहों के बैंक खातों में 28.20 लाख रुपये का रिवाल्विंग फंड भेजा जा रहा है। प्रत्येक समूह को 30 हजार रुपये मिलेंगे। इसके लिए सभी विकास खंडों से रिवाल्विंग फंड से वंचित समूहों के बैंक खातों का विवरण मांगा गया था। अभी तक 94 समूहों के खाते विभाग को मिल चुके हैं। जल्द ही इनमें धनराशि भेज दी जाएगी। इस फंड की खासियत यह है कि समूह की सदस्य जरूरत के अनुसार इससे ऋण ले सकती हैं। ऋण की राशि समूह में धीरे-धीरे वापस करनी होगी। चाहें तो महिलाएं ब्याज समेत एकमुश्त राशि भी जमा कर सकती हैं। समूह में उपलब्ध धनराशि और सदस्यों की जरूरत के आधार पर ऋण देने का निर्णय लिया जाएगा।
जिला मिशन प्रबंधक नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि 94 समूहों के खाते मिले हैं। प्रत्येक खाते में 30 हजार रुपये की दर से 28.20 लाख रुपये भेजे जा रहे हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला उपायुक्त केडी गोस्वामी ने बताया कि रिवाल्विंग फंड का उद्देश्य महिलाओं को छोटी जरूरतों के लिए आसानी से ऋण उपलब्ध कराना है। इससे वे अपने रोजगार को बढ़ाने के साथ परिवार की जरूरी जरूरतें भी पूरी कर सकेंगी।
छोटी दुकान से बढ़ेगा घर का सहारा
गांवों में पान-चाय, परचून, दूध बिक्री और दूसरे छोटे कारोबार से जुड़ी महिलाओं के लिए यह फंड खासा मददगार होगा। कारोबार में पूंजी लगाकर वे बिक्री बढ़ा सकेंगी। जरूरत पड़ने पर इसी राशि से बच्चों की फीस और घरेलू खर्च भी पूरा किया जा सकेगा। यानी समूह की छोटी पूंजी महिलाओं के रोजगार को बढ़ाने के साथ परिवार की आर्थिक मजबूती का भी आधार बनेगी।