सुल्तानपुर। शासन की ओर से शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बेसिक के निजी विद्यालयों को 25 फीसदी सीटों पर कमजोर वर्ग के बच्चों को प्रवेश देना है, लेकिन स्कूल प्रबंधन शिक्षा विभाग को ही झांसा दे रहे हैं। पूर्व में शहर में दो वार्ड अतिरिक्त बनाए जाने का मामला सामने आ चुका है। अब शहर से सटे ग्रामीण क्षेत्र के एक निजी विद्यालय का प्रकरण प्रकाश में आया है। विद्यालय जिस ग्राम पंचायत में मौजूद है, उसके बजाय दूसरी ग्राम पंचायत का पता पोर्टल पर डाल दिया गया है। इसके बाद बच्चों के आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं।
दूबेपुर विकास खंड में शहर से सटी करौंदिया देहात ग्राम पंचायत में एक नामी गिरामी निजी विद्यालय है। बताया जा रहा है कि शासन के आदेश पर जब कमजोर वर्ग के बच्चों के निशुल्क प्रवेश देने की बात आई तो निजी विद्यालय ने अपना पता ही गलत डाल दिया। करौंदिया देहात के बजाय विद्यालय पलहीपुर ग्राम पंचायत में होना दर्शा दिया। इसके बाद जब पलहीपुर के बच्चों के आवेदन आए तो विद्यालय करौंदिया देहात में स्थित होने की बात कह सभी के आवेदन खारिज कर दिए। पलहीपुर गांव निवासी साेनू कुमार की बेटी महक का इसी आधार पर आवेदन निरस्त किया गया।बताया जा रहा है कि इसी तरह अन्य आवेदन भी निरस्त कर दिए गए।
आरटीई के तहत निशुल्क प्रवेश के तीन चरण बीत गए हैं, लेकिन इस नामी-गिरामी विद्यालय में अभी तक कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित की गईं सभी 20 सीटें खाली हैं। चौथे व अंतिम चरण के आवेदन की अंतिम तिथि 19 मार्च बीतने वाली है। विभाग की ओर से हस्तक्षेप नहीं किए जाने से सभी सीटें खाली रहने की संभावना है। मामले की शिकायत कांग्रेस नेता रणजीत सिंह सलूजा ने शिक्षा महानिदेशक से की है। बताया कि अभी तक एक भी प्रवेश इस स्कूल में नहीं हो सका है।
गड़बड़ी मिलने पर कराया जाएगा दुरुस्त
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी उपेंद्र गुप्ता का कहना है कि प्रकरण जानकारी में आने के बाद एक वार्ड को दुरुस्त करा दिया गया। यदि पोर्टल में गड़बड़ी की गई है तो इसे भी दुरुस्त कराया जाएगा।