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लॉकडाउन में रोडवेज को हुआ सात करोड़ 70 लाख का घाटा

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सुल्तानपुर। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए किए गए लॉकडाउन में जिले के रोडवेज डिपो को सात करोड़ 70 लाख रुपये के राजस्व का घाटा उठाना पड़ा है। बस स्टेशन से संचालित होने वाली रोडवेज और अनुबंधित बसें 70 दिनों तक नहीं चल पाई। औसतन प्रतिदिन 11 लाख रुपये की कमाई करने वाले डिपो की आय मौजूदा समय में घटकर आधी हो गई है। अब धीरे-धीरे बस स्टेशन पर चहल-पहल बढने लगी है।
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जिले के रोडवेज डिपो से परिवहन निगम की 83 बसें संचालित हो रही हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए 34 बसें निगम से अनुबंधित की गई हैं। लॉकडाउन से पहले डिपो को औसतन प्रत्येक दिन करीब 11 लाख रुपये की आमदनी होती थी।
कोविड-19 के कारण पिछले 22 मार्च से लॉकडाउन होने पर रोडवेज की बसों का संचालन बंद कर दिया गया था। 22 मार्च से 31 मई तक लॉकडाउन के दौरान बसों का संचालन नहीं होने से रोडवेज डिपो को करीब सात करोड़ 70 लाख रुपये के राजस्व का घाटा उठाना पड़ा है।
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लॉकडाउन के दौरान बस स्टेशन पूरी तरह से सूना पड़ा रहा। एक जून से रोडवेज की बसों का संचालन शुरू हो गया है। अपेक्षा से काफी कम यात्री आने का असर परिवहन निगम पर पड़ा है। लॉकडाउन से पहले औसतन प्रत्येक दिन करीब 11 लाख रुपये की आमदनी करने वाले रोडवेज डिपो की आय घटकर आधी हो गई है।
मौजूदा समय में परिवहन निगम को तकरीबन पांच लाख रुपये की ही आय हो रही है। ऐसा कम संख्या में यात्रियों के बसों से सफर करने के कारण हुआ है। हालांकि, अब धीरे-धीरे बस स्टेशन पर चहल-पहल बढने लगी है। लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए रोडवेज की बसों से सफर तय करने के लिए बस स्टेशन पहुंच रहे हैं।
लॉकडाउन में प्रत्येक सरकार के आदेश पर रोडवेज डिपो की बसें छात्र-छात्राओं के लिए लगाई गई थी। राजस्थान के कोटा व प्रयागराज में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए गए स्टूडेंट्स को लाने के लिए जिले के रोडवेज डिपो से बसें भेजी गई थी।
वहां से छात्र-छात्राओं को बसों से लाकर उनके घर तक पहुंचाया गया था। इसका पूरा खर्च प्रदेश सरकार ने उठाया था। निगम को प्रदेश सरकार ने खर्चा दे दिया था। इससे रोडवेज की माली हालत में काफी सुधार हुआ था।
लॉकडाउन के दौरान देश के विभिन्न शहरों से प्रवासी श्रमिकों को ट्रेनों से जिले में लाया गया। रेलवे स्टेशन से प्रवासी श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए रोडवेज की बसें लगाई गई थी। रोडवेज के चालकों व परिचालकों ने सुरक्षा मानक का पालन करते हुए प्रवासी श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचाने में मदद की। इसका पूरा खर्च प्रदेश सरकार ने उठाया था। इससे रोडवेज की आय में कुछ सुधार हुआ था।
लॉकडाउन के बाद बसों का संचालन शुरू करा दिए जाने से बस स्टेशन पर पहुंचने वाले लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग कराई जा रही है। बस स्टेशन पर ऑटो सैनिटाइजर मशीन लगाई गई है। इसमें लोग स्वयं का सैनिटाइज कर रहे हैं। इसके अलावा सभी परिचालकों को सैनिटाइजर दिया गया है। वे बसों पर चढने वाले यात्रियों को सैनिटाइज कर रहे हैं। परिचालक रास्ते में बसों पर यात्रा करने के लिए आने वाले लोगों को सैनिटाइज करते हैं।
बस स्टेशन इंजार्च अजय सिंह ने बताया कि लॉकडान के बाद पिछले एक जून से बसों का संचालन शुरू करा दिया गया है। रोडवेज की सभी बसें चल रही हैं, जबकि 34 में से 12 अनुबंधित बसें ही चलाई जा रही है। कम बसों के चलने के पीछे यात्रियों का कम सफर करना माना जा रहा है।
कम यात्री आने से रोजाना निगम को होने वाली आय घटकर करीब पांच लाख रुपये हो गई है। राजधानी दिल्ली, लखनऊ, कानपुर समेत सभी लंबी दूरी की और लोकल रूट पर बसें चलने लगी है। सरकार ने 52 यात्रियों को बसों में चलने की अनुमति प्रदान की है।
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