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महंगी होगी पंचायत चुनाव की प्रचार सामग्री

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सुल्तानपुर। भारत-चीन की तल्खी आगामी पंचायत चुनाव पर भी असर डालेगी। आर्ट पेपर महंगा होने से कागज की कीमतों में बेतहाशा वृद्घि हो गई है। बाजार में कागज के दामों में 25 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी का सीधा प्रभाव प्रचार सामग्री पर पड़ा है। इसका असर पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों की जेब पर पड़ेगा।
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करीब साल भर से सीमा को लेकर भारत और चीन के संबंधों में चली आ रही खटास से चाइना से आर्ट पेपर (बढ़िया कागज) का आयात तकरीबन बंद हो गया हैै। इसका असर लॉकडाउन के बाद खुले बाजारों पर पड़ा है। बाजार में कागज, दफ्ती व अन्य सामग्री की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है।
बढ़िया कागज के दामों में 25 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी का प्रभाव प्रचार सामग्री पर पड़ना तय है। सामग्री महंगी होने से इसका सीधा असर पंचायत में उम्मीदवारों पर पड़ेगा। गांव स्तर के चुनाव में सर्वाधिक खपत पोस्टर, पंफ्लेट, बिल्ला व डुप्लीकेट बैलेट पेपर की होती है।
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ये सामग्री कागज व कार्ड शीट पर ही छापी जाती हैं। वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में बड़े पोस्टर 4,500 व छोटे 1000 रुपये में बिके थे। इस बार पोस्टर की कीमत 5500 रुपये तक पहुंच चुकी है। पोस्टर की कीमत में बढ़ोतरी को देखते हुए पंफ्लेट, बिल्ला, फ्लैक्स व डुप्लीकेट बैलेट पेपर जैसी पंचायत चुुनाव की प्रचार सामग्री भी महंगी हो जाएगी।
प्रिटिंग प्रेस संचालक विवेक बरनवाल ने बताया कि पंचायत चुनाव में सर्वाधिक मांग विजिटिंग कार्ड, स्टिकर व पोस्टर की रहती है। ज्यादातर कलरफुल मैटेरियल महानगरों से ही मंगाए जाते हैं। कागज के रोजाना बढ़ते दाम से किसी भी उत्पाद का मूल्य तय कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह से उम्मीदवारों को भी कुछ साफ नहीं बताया जा रहा है। वृद्घि का असर सभी प्रचार सामाग्रियों पर पड़ना निश्चित है।
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