सुल्तानपुर। ‘एक जिला एक उत्पाद’ को बढ़ावा देने की कोशिशों में रेलवे भी आगे आया है। जिले के प्रसिद्ध मूंज उत्पाद से जुड़े व्यापारी अब रेलवे स्टेशन पर अपना स्टॉल लगा सकेंगे। रेलवे की ओर से शुरू की गई ‘एक स्टेशन, एक उत्पाद’ की योजना के लिए लखनऊ मंडल के 11 जिलों का चयन किया गया है, जिसमें सुल्तानपुर भी शामिल है। इस योजना से न केवल संबंधित उत्पाद की बिक्री होगी बल्कि देश व्यापी पहचान भी बढ़ेगी। स्टॉल के लिए रेलवे ने जिले के मूंज उत्पाद से जुड़े लोगों से आवेदन मांगे हैं।
पारंपरिक शिल्प एवं लघु उद्यमों के संरक्षण और रोजगार सृजन के लिए रेलवे ने ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ योजना संचालित की है। इसी कड़ी में वाराणसी के काष्ठ निर्मित खिलौनों (वूडेन ट्वॉयज) को वाराणसी रेलवे स्टेशन के लिए चयनित किया गया था। गत 25 मार्च से लागू यह प्रोजेक्ट पूरे देश में कई रेलवे स्टेशनों पर सफलता पूर्वक चल रहा है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य लघु उद्योग की वृद्धि व विकास करना है ताकि स्थानीय कारीगरों की कला को प्रोत्साहित करते हुए उनको रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें। वाराणसी समेत दूसरे रेलवे स्टेशनों पर ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ प्रोजेक्ट की सफलता के बाद रेलवे लखनऊ मंडल के अन्य 11 स्टेशनों को चयनित कर इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारंभ करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
पायलट प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद मंडल के लखनऊ, वाराणसी सहित 12 स्टेशनों पर संबंधित क्षेत्र के उत्पाद के स्टॉल संचालित होने लगेंगे। इसमें सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन का चयन मूंज उत्पाद का स्टॉल लगाने के लिए किया गया है। रेलवे की इस योजना से जिले के प्रसिद्ध मूंज उत्पाद को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही दूर-दराज की ट्रेनों के यात्रियों की वजह से देश व्यापी पहचान भी बढ़ेगी।
इन स्टेशनों पर लगेंगे स्टॉल
लखनऊ रेल मंडल के जिन 11 रेलवे स्टेशनों पर यह पायलट प्रोजेक्ट संचालित किया जाना है। उनमें लखनऊ में चिकनकारी, प्रतापगढ़ में आंवला, अयोध्या कैंट में गुड़, उन्नाव में चमड़े के उत्पाद, सुल्तानपुर में मूंज के उत्पाद, रायबरेली में काष्ठ-शिल्प उत्पाद, जौनपुर स्टेशन में ऊनी कारपेट, बाराबंकी में टेक्सटाइल, भदोही में कारपेट उत्पाद, अमेठी में मूंज उत्पाद के स्टॉल लगाकर उसके विक्रय की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।