सुल्तानपुर। वाराणसी रेलखंड पर 20 करोड़ के बजट से डबल ट्रैक बनाने के प्रोजेेक्ट पर एक बार फिर ब्रेक लग गया है। कर्मचारियों की कमी व संसाधनों की किल्लत से इंजीनियरों ने दोहरीकरण परियोजना से हाथ समेट लिए हैं। स्टेशनों के बीच जगह-जगह गिट्टी व स्लीपरों की खेप अस्त-व्यस्त पड़ी हुई है। निर्माण की रफ्तार थमने से रूट की 50 से अधिक यात्री गाड़ियों को समय पर चलाने की रेल प्रशासन की मंशा साकार नहीं हो पा रही है।
वित्तीय सत्र 2006 में रेल प्रशासन ने लखनऊ-वाराणसी रेलखंड का व्यस्ततम रूट में शुमार किया था। ट्रैक पर गाड़ियों के आवागमन की संख्या की निगरानी करने व इंजीनियरिंग व परिचालन विभाग को निर्देशित किया गया। पाया गया कि एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, पैसेंजर, स्पेशल ट्रेनों को मिलाकर 50 से अधिक गाड़ियां रोजाना दौड़ रही हैं। मालगाड़ियों की संख्या भी प्रतिदिन करीब 20 दर्ज की गई थी।
रूट पर ट्रेनों का दबाव नियंत्रित करने के लिए रेलवे बोर्ड ने नए ट्रैक को मंजूरी दी दी। अक्तूबर 2008 में सुल्तानपुर-बंधुआकलां स्टेशनों के बीच दोहरीकरण परियोजना की शुरुआत हुई। इसके बाद सुल्तानपुर-भदैंया व भदैंया-लंभुआ स्टेशनों के बीच दूसरा ट्रेन बनाने को इंजीनियरों को अधिकृत किया गया। मौजूदा स्थिति यह है कि कर्मचारियों की कमी व संसाधनों की समस्या के चलते एक बार फिर डबल ट्रैक निर्माण पर ब्रेक लग गया है। छोटे स्टेशनों के बीच गिट्टी व स्लीपरों की खेप अस्त-व्यस्त पड़ी हुई है।
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