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तीन हत्यारों को उम्रकैद की सजा

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सुल्तानपुर। हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए तीन अभियुक्तों को एडीजे पीके जयंत ने बुधवार को आजीवन कारावास व 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने दो आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। मामला अमेठी कोतवाली से जुड़ा है।
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धम्मौर थाने के भाले सुलतान का पुरवा मौजा पिंडोरिया निवासी अमर बहादुर अपने भाई रामसूरत यादव के साथ 29 अप्रैल 2005 को निमंत्रण देने के लिए अमेठी गए थे। वहां से घर वापस लौटते समय रंजिश को लेकर रास्ते में अमेठी क्षेत्र के कड़ेरगांव नहर की पुलिया पर घात लगाकर बैठे आरोपियों ने भाला, लाठी व डंडा से मारकर रामसूरत यादव की हत्या कर थी, जबकि अमर बहादुर घायल हो गए थे। पुलिस ने अमर बहादुर की तहरीर पर आरोपियों बब्बू सिंह, राजकुमार तिवारी, डब्बू सिंह, बंधु पांडेय व तेज बहादुर सिंह पर केस दर्ज किया था। विवेचना में झल्लू कश्यप उर्फ रामलौट, मुन्ने सिह उर्फ सूर्य बिहारी व नन्हे उर्फ वेद प्रकाश तिवारी भी आरोपी बनाए गए थे। मुकदमे के दौरान आरोपी तेज बहादुर सिंह की मौत हो गई थी जबकि बब्बू सिंह व नन्हे उर्फ वेद प्रकाश तिवारी अनुपस्थित रहे।
अभियोजन पक्ष की पैरवी कर रहे एडीजीसी क्रिमिनल संदीप सिंह ने मुकदमे के दौरान पांच गवाहों को कोर्ट में पेश किया। गत सोमवार को एडीजे पीके जयंत ने आरोपियों डब्बू सिंह, राजकुमार तिवारी व बंधु पांडेय को दोषी करार देते हुए सजा सुनाने के लिए बुधवार की तिथि नियत की थी। आरोपी झल्लू कश्यप व मुन्ने उर्फ सूर्य बिहारी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। बुधवार को सजा के बिंदु पर एडीजीसी क्रिमिनल संदीप सिंह और बचाव पक्ष ने दलीलें पेश की। एडीजे पीके जयंत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आरोपियों डब्बू सिंह, राजकुमार तिवारी व बंधु पांडेय को आजीवन कारावास व 25-25 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाकर जेल भेजने का आदेश दिया है। जुर्माना की 80 फीसदी धनराशि मृतक के परिवारीजनों को मिलेगी।
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