शासन की ओर से विकास कार्यों की कराई जा रही रैकिंग में आला अफसरों की मेहनत के बाद भी कुछ विभाग फिसड्डी रह गए। डी श्रेणी मिलने से शासन से अफसरों को फजीहत भी झेलनी पड़ी है। इसमें सार्वजनिक उपक्रम से भी जुड़े कई कार्य शामिल हैं। हालांकि कुछ विभागों ने अपनी प्रगति 75 फीसदी से ऊपर लाकर ए श्रेणी प्राप्त कर ली है।
योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के दौरान शासन जिलों एवं मंडलों को कार्य के हिसाब से रैकिंग शुरू कर दी है। रैकिंग के पीछे शासन की मंशा अच्छा कार्य करने वाले विभागों को प्रोत्साहित करने एवं खराब प्रगति वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बताई जा रही है।
शासन स्तर से 109 योजनाओं की रैकिंग प्रणाली शुरू होते ही विभाग शुरुआत में जरूर कुछ सकते में आए बाद में वे अपने ढर्रे पर चलने लगे। शासन एवं आला अफसरों की कड़ाई के बाद भी कई विभागों की कार्यशैली में बदलाव नहीं आ सका है। सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े व सरकार के प्रथम प्राथमिकता में शामिल कई कार्य अधिकारियों की लापरवाही से पिछड़े हैं। समग्र लोहिया गांवों के सड़क निर्माण में भी अधिकारियों की बड़ी किरकिरी हुई है।
अभी तक बीते वित्तीय वर्ष के कार्य पूरे नहीं होने से पीडब्ल्यूडी को डी श्रेणी मिली है। हालांकि कुछ कार्य में पीडब्ल्यूडी को एक श्रेणी भी मिली है। राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना में भी विद्युत वितरण खंड की खराब स्थिति पाई गई है। सरकार की प्रथम प्राथमिकता में शामिल कई कार्यों में डी श्रेणी मिलने से शासन में समीक्षा के दौरान अधिकारियों को फजीहत भी झेलनी पड़ी है।