गौरीगंज। जिले में संचालित निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना में रुचि नहीं ले रहे हैं। आलम यह है कि स्वास्थ्य महकमे के तमाम प्रयास के बावजूद अब तक 46 में से मात्र दो निजी अस्पतालों ने ही इस योजना के तहत अपना पंजीयन कराया है।
शासन के निर्देश तथा स्वास्थ्य विभाग के प्रयास के बावजूद अब तक सिर्फ पांच अस्पतालों में ही मरीजों को योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसमें तीन अस्पताल सरकारी हैं।
केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना जिले में औंधे मुंह गिरी है। केंद्र व प्रदेश सरकार के निर्देश के बावजूद अब तक जिले में संचालित सरकारी क्षेत्र के संयुक्त जिला अस्पताल के सीएचसी अमेठी व सीएचसी जगदीशपुर ही योजना के तहत पंजीकृत है।
मानक पूरा करने वाले मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल तथा जगदीशपुर के इंडस्ट्रियल एरिया में संचालित सूर्या हॉस्पिटल (दोनों अस्पताल में 110 बेड की सुविधा) ही पंजीकृत हो सके हैं।
योजना के तहत अब तक 488 मरीजों का ही इलाज किया गया है। इसमें सरकारी अस्पतालों की भागीदारी बहुत ही कम है। संयुक्त जिला अस्पताल में 68, सीएचसी अमेठी में 61, सीएचसी जगदीशपुर नें 15 मरीज का इलाज किया जबकि सूर्या हॉस्पिटल ने 98 व अकेले संजय गांधी अस्पताल ने 246 मरीजों का इलाज किया।
खास बात यह है कि मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल को छोड़कर अन्य चारों अस्पताल की ओर से गंभीर रूप से बीमार को अधिकतर रेफर करने का ही कार्य किया गया है। योजना के कड़े नियमों को देखकर जिले के कई निजी अस्पताल अपना पंजीयन कराने से कतरा रहे हैं जबकि वह योजना के मानक को पूरा कर रहे हैं।
योजना शुरू होने के करीब 18 माह बाद भी योजना में शामिल जिले के 70 फीसदी लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड मुहैया नहीं कराया जा सका है। यह स्थिति तब है जब स्वास्थ्य विभाग इसके लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाने के अलावा स्वास्थ्य कर्मियों के साथ बैठक कर कड़े दिशा निर्देश दे रहा है।
आंकड़ों को आधार मानें तो योजना में जिले के 1,22,474 परिवार पंजीकृत हैं। इन परिवारों को वर्ष 2011 की आर्थिक, सामाजिक व जातीय जनगणना के आधार पर शामिल किया गया है।
इसमें से 37,500 परिवारों को गोल्डन कार्ड जारी कर दिया गया है। बाकी बचे 84,972 का गोल्डन कार्ड बनाने के लिए आशा बहू, आशा संगिनी व एएनएम को लगाया गया है।
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