करौंदीकला के धारूपुर गांव में मृतक के घर इकट्ठा ग्रामीण।
करौंदीकला। धारूपुर गांव निवासी पुजारी श्यामजी शास्त्री (38) की रविवार को लखनऊ में चिकित्सक के पास ले जाते समय मौत हो गई। परिजनों के आरोप के मुताबिक, 10 सितंबर को उनकी विपक्षियों से मारपीट हो गई थी। वह घर से शनिवार को इलाज कराने लखनऊ गए थे।
रास्ते में हुई मौत के बाद दोपहर को परिजन शव लेकर घर पहुंचे तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। मृतक की पत्नी की तहरीर पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
मृतक की पत्नी सविता देवी ने बताया कि पति श्यामजी शास्त्री कर्मकांड के तहत घरों में पूजा-पाठ कराते थे। इसीलिए गांव के लोग उन्हें पुजारी भी कहते थे। उन्होंने एक बंदर पाल रखा है। गांव के कुछ लोगों ने 10 सितंबर को बंदर के काटने का आरोप लगाते हुए उनके पति से विवाद किया था। विरोध पर विपक्षियों ने उन्हें लाठी से मारा पीटा था। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
आरोप है कि जब उनके पति श्यामजी शास्त्री करौंदीकला थाने पर गए तो वहां पर पुलिस कर्मियों ने उन्हें मारा पीटा। पीड़िता ने 11 सितंबर को पुलिस अधीक्षक से की थी। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से घायल श्यामजी का इलाज नहीं हो पा रहा था। लखनऊ में बहन के बुलाने पर श्यामजी शनिवार को इलाज कराने के लिए गए थे।
रविवार को बहन के घर से वह चिकित्सक के पास जा रहे थे। इसी बीच उनकी मौत हो गई। परिजन शव लेकर घर पहुंचे। सविता देवी ने करौंदीकला थाने में पोस्टमार्टम के लिए तहरीर दी। करौंदीकला थानाध्यक्ष चंद्रभान वर्मा ने बताया कि पुलिस पर मारपीट का आरोप निराधार है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने पर स्थिति स्पष्ट होगी।
मुखिया की मौत से छिना सहारा
सविता देवी ने बताया कि श्यामजी परिवार के मुखिया थे। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। श्यामजी के पूजा पाठ से घर का खर्च चलाते थे। उनकी मौत से बड़ा सहारा छिन गया है। उनके कोई संतान नहीं है।