सुल्तानपुर। कोरोना से बचाव के लिए हुए लॉकडाउन के खत्म होते ही हरी सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे हैं। इसका मुख्य कारण बरसात और सब्जियों का बाहर जाना बताया जा रहा है। पखवारे भर पहले तीन रुपये किलो बिकने वाला कद्दू अब आठ गुना छलांग लगाकर 25 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं, पांच दिन पहले 30 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाला टमाटर अब 80 रुपये तक पहुंच गया है।
जुलाई का महीना लगते ही तीन महीने से लॉकडाउन का दंश झेल रहे सब्जी किसानों की बल्ले-बल्ले हो गई है। हरी सब्जियों के दाम चार से आठ गुना बढ़ गए हैं। इससे सब्जी विक्रेताओं व सब्जी खरीदारों के जहां होश उड़ गये हैं, वहीं आढ़तिए व किसान खुश नजर आ रहे हैं।
मार्च के अंतिम तारीखों तक जहां कोरोना महामारी से लॉकडाउन लागू हुआ तो सब्जी की फसल का उत्पादन शीर्ष पर था। कोरोना के चलते कद्दू, लौकी, भिंडी, पालक, धनिया सब का दाम 10 गुना कम हो गया। हालत यह हो गई कि किसानों ने सब्जी की तैयार फसल ही जानवरों व लोगों के लिए छोड़ दिया। हरी धनिया, पालक सब खेतों में ही बेकार हो गए।
30 जून को लॉकडाउन खत्म हुआ और मानसूनी बारिश की शुरुआत हुई तो अधिकांश सब्जी की फसल नष्ट हो गई। वाजिब दाम नहीं मिलने से किसानों खेतों को जोतवाकर धान की रोपाई करा दी। इससे सब्जी की फसल के दाम में अचानक उछाल आ गया है।
कद्दू तीन रुपये से 25 रुपये किलो, लौकी तीन रुपये से 20 रुपये, टमाटर 30 रुपये से 80 रुपये, आलू 20 रुयये से 30 रुपये, खीरा 14 रुपये से 40 रुपये, बैंगन 15 रुपये से 50 रुपये, करेला 15 रुपये से 40 रुपये, तरोई 15 रुपये से 30 रुपये, परवर 15 रुपये से 100 रुपये तथा प्याज 15 रुपये से 20 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। अब लोग सब्जी लेने बाजारों तक नहीं जा रहे हैं।
सब्जी का भाव बढ़ने का दो कारण किसान व दुकानदार बता रहे हैं। सब्जी किसान बब्लू सिंह के अनुसार लॉकडाउन की बंदिशें खत्म होने पर सब्जियां गैर जनपदों में भी भेजी जाने लगीं। इससे मूल्य में इजाफा हुआ है। वहीं दुकानदार पुन्नवासी व वेद प्रकाश गुप्ता कहते हैं कि बरसात होने से अधिकांश अगेती सब्जी की फसल खत्म हो गई है। इससे उत्पादन 70 फीसदी कम हो गया है।