सुल्तानपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर प्रकाशित प्रस्तावित आरक्षण सूची को लेकर अफसरों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कुछ जनप्रतिनिधि उसमें संशोधन कराने की कोशिश में जुटे हैं। फिलहाल अधिकारी प्रकाशित सूची दुरुस्त होने का दावा कर रहे हैं।
दो मार्च को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर प्रस्तावित आरक्षण सूची पंचायतराज विभाग की ओर से प्रकाशित की गई। सूची प्रकाशित होते ही आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया। जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य वार्ड, ब्लॉक प्रमुख व ग्राम प्रधान के पद का मनमाफिक आरक्षण नहीं मिलने पर अधिकांश सत्तासीन नाराज हो गए।
सत्तासीन आरक्षण सूची को गड़बड़ तो अधिकारी उसे सही बता रहे हैं। प्रकाशित प्रस्तावित आरक्षण सूची का मामला शासन, निर्वाचन आयोग व सांसद तक पहुंच चुका है। सांसद भी इस पर आपत्ति जता चुकी हैं। सत्तासीन विधायक व कई भाजपा पदाधिकारी सूची को लेकर डीएम, सीडीओ व डीपीआरओ से मिलकर अपनी नाराजगी जता चुके हैं।
सत्तासीन सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए उसमें संशोधन की मांग उठा रहे हैं। बढ़ते दबाव से अधिकारी परेशान हो गए हैं। अधिकारी सूची को सही ठहराते हुए तथ्यपरक त्रुटि मिलने पर ही संशोधन की बात कह रहे हैं। बढ़ते दबाव से सूची को लेकर असमंजस बना है।
डीडीसी वार्ड संख्या 30 पर भी आपत्ति दाखिल
जिला पंचायत के वार्ड संख्या 30 के आरक्षण को लेकर भी आपत्ति दाखिल हुई है। सदर तहसील के अजियाउर देवी गांव निवासी राघवेंद्र प्रकाश द्विवेदी ने वार्ड संख्या 30 को ओबीसी के लिए आरक्षित किए जाने पर सवाल उठाया है। उन्होंनें इस वार्ड के आरक्षण में जनसंख्या व परिवार संख्या में काफी अंतर बताया है।
साथ ही वर्ष 2015 के आरक्षण की स्थिति को निल दिखाए जाने पर भी सवाल उठाया है। कहा कि वार्ड संख्या 30 का गठन पुराने वार्ड 22 से किया गया है। पुराने वार्ड 22 की करीब 70 फीसदी जनसंख्या, क्षेत्र पंचायत वार्ड व ग्राम पंचायत नए गठित डीडीसी वार्ड संख्या 30 में आ गए हैं।
ऐसे में उसे पुराना वार्ड मानते हुए ओबीसी के आरक्षण से बाहर किया जाय। उनका कहना है कि इसके पहले वार्ड संख्या 22 ओबीसी के लिए आरक्षित हो चुका है। इस बार ओबीसी का आरक्षण होने से वार्ड संख्या 30 की 70 फीसदी आबादी फिर प्रभावित हो रही है।
जिला पंचायतराज अधिकारी आरके भारती का कहना है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का आरक्षण शासन की गाइडलाइन के मुताबिक किया गया है। कहीं कोई गड़बड़ी नहीं की गई है। तथ्यपरक त्रुटि मिलने पर ही संशोधन किया जाएगा।