सुल्तानपुर। जिले के करीब 35 ऐसे गांव हैं, जोकि गोमती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे रहने के बाद भी पानी से घिर जाते हैं। इन गांवों के खेत, खलिहान डूब जाते हैं।
प्रशासन ने बाढ़ से पहले ही तैयारियां शुरू कर दी हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों को निकालने के लिए 15 नावों की व्यवस्था की गई है। बाढ़ शरणालय बनाए गए हैं, जहां खाने-पीने और रहने के पुख्ता इंतजाम होंगे।
बाढ़ से बचाव की तैयार कार्ययोजना में गोमती नदी का जलस्तर 84.735 मीटर आंका गया है। प्रशासन के मुताबिक खतरे के इस निशान से गोमती नदी का जलस्तर अंतिम बार वर्ष 2008 में 85.820 मीटर तक गया था। हालांकि अभी तक खतरे के निशान को गोमती नदी ने पार नहीं किया है। प्रशासन ने शासन के निर्देश पर बाढ़ से बचाव की कार्ययोजना तैयार कर ली है। लंभुआ के प्राथमिक विद्यालय मुरारचक, सदर तहसील के भंडरा
परसुरामपुर व तहसील को शरणालय बनाया गया है।
बाढ़ की स्थिति में पशुओं व लोगों के बचाव के लिए बड़ी व छोटी 15 नावों व नाविकों का इंतजाम किया गया है। प्रभावित पशुओं को ठहराने के लिए 26 चौकियां बनाई गई हैं। लोगों की सुरक्षा के लिए तीन पुलिस चौकियां चिह्नित की गई हैं।
बाढ़ की स्थिति में राशन, मोमबत्ती, दवाओं व साफ-सफाई समेत अन्य इंतजाम किए गए हैं। तहसीलवार कर्मचारियों को लगाते हुए एसडीएम को अपनी तहसीलों का नोडल बना दिया गया है। जिले की जिम्मेदारी दैवीय आपदा अधिकारी व अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को दी गई है।
पूरे किए गए इंतजाम
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व एस. सुधाकरन ने बताया कि गोमती नदी में कई वर्षों से बाढ़ नहीं आई है। इसके बावजूद इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। बाढ़ की स्थिति में लोगों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए तैयारी की जा रही है।