एक युवती को प्रसव पीड़ा होने पर सीएचसी लाया गया। अविवाहित होने के कारण वहां तैनात सुपरवाइजर ने उसे डांटकर भगा दिया। पीड़ा अधिक होने पर मां उसे अस्पताल के पास एक खंडहर में ले गई। वहीं युवती ने नवजात शिशु को जन्म दिया। घटना की जानकारी होने के बाद ग्रामीण भड़क गए।
ग्रामीणों ने सीएचसी पर जमकर हंगामा किया। आननफानन में सीएचसी प्रभारी ने जच्चा-बच्चा को तत्काल भर्ती कर चिकित्सीय सेवा शुरू कर दी। जयसिंहपुर क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 20 वर्षीय दलित युवती की शादी नहीं हुई थी। उसका एक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इस दौरान युवती गर्भवती हो गई।
शनिवार की सुबह युवती को प्रसव पीड़ा उठने पर उसकी मां उसे लेकर सीएचसी जयसिंहपुर पहुंची। सीएचसी पर तैनात सुपरवाइजर ने युवती से उसके पति का नाम पूछा तो उसने बताया कि उसकी शादी नहीं हुई है। यह सुनते ही सुपरवाइजर युवती पर भड़क गई।
उसने सरकारी पर्चे पर युवती के शरीर में खून की कमी और पति का नाम नहीं बता पाने की बात लिखते हुए उसे रेफर कर दिया। इस दौरान युवती को तेज दर्द उठा तो उसकी मां उसे लेकर सीएचसी के पास एक खडंहर में पहुंची, जहां जमीन पर ही युवती ने एक नवजात शिशु को जन्म दिया।
युवती के साथ हुई घटना की सूचना पाते ही कई ग्रामीणों ने सीएचसी पहुंचकर हंगामा शुरू कर दिया। ग्रामीणों के रुख को देखते हुए सीएचसी प्रभारी आरके कनौजिया तत्काल खडंहर के पास पहुंचे और दलित युवती और उसके नवजात शिशु को सीएचसी में भर्ती किया। मां-बेटे का इलाज चल रहा है।
सीएचसी प्रभारी आरके कनौजिया ने बताया कि युवती को डांटकर भगाने के मामले में संबंधित सुपरवाइजर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मौजूदा समय में युवती और उसका बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
सीएमओ डॉ. केबी सिंह ने बताया कि चाहे किसी की शादी हुई हो या नहीं, स्वास्थ्य कर्मियों की जिम्मेदारी थी कि वे युवती को एडमिट कर प्रसव कराते। मामले की जांच का आदेश दिया गया है। जांच के बाद दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।