जिले के ऐतिहासिक दुर्गापूजा महोत्सव का बुधवार की रात समापन हो गया। देवी पंडाल सूने हो गए हैं। बृहस्पतिवार को पंडालों में स्थापित देवी प्रतिमाओं को विसर्जित करने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सजाई गईं। बड़ी दुर्गा का पूजन करने के बाद सभी देवी प्रतिमाओं की बारी-बारी से विसर्जन शोभायात्रा निकाली गई। गाजे-बाजे व अबीर-गुलाल उड़ाते हुए देवी मां के भक्त विसर्जन जुलूस में शामिल हुए।
दुर्गापूजा महोत्सव के लिए शहर में जगह-जगह सजाए गए देवी पंडाल बृहस्पतिवार को खाली हो गए। पूजा समिति के पदाधिकारी व कार्यकर्ता सुबह से ही मां को अंतिम विदाई देने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सजाने लगे। शाम तक सभी देवी प्रतिमाओं को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर रखा गया। शहर के चौक स्थित घंटाघर के पास सभी दुर्गा पूजा समिति के पदाधिकारियों को प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए नंबर अलॉट किया गया। चौक स्थित बड़ी दुर्गा माता का पूजन-अर्चन होने के बाद सभी देवी प्रतिमाओं की क्रम से विसर्जन शोभायात्रा निकाली गई। देर शाम निकली शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी। शुक्रवार भोर से सीताकुंड घाट स्थित आदि गंगा गोमती में देवी प्रतिमाओं के विसर्जन की शुरुआत की जाएगी।
48 घंटों तक चलेगा देवी प्रतिमाओं का विसर्जन
दुर्गापूजा महोत्सव का समापन देवी प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ होता है। विसर्जन के पूर्व नगर क्षेत्र में देवी प्रतिमाओं की शोभायात्रा निकाली जाएगी। प्रतिमाओं से सजी झांकियां चौक स्थित ठठेरी बाजार से निकलकर शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए सीताकुंड घाट पर पहुंचेंगी। यहां से आदि गंगा गोमती में प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ महोत्सव का औपचारिक समापन होता है। केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति के संरक्षक राधेरमण मिश्र वैद्य ने बताया कि तकरीबन 48 घंटे तक देवी प्रतिमाओं के विसर्जन का कार्यक्रम चलेगा।
चरम पर रहा दुर्गापूजा महोत्सव
बुधवार रात दुर्गापूजा महोत्सव चरम पर रहा। पंडालों में देवी प्रतिमाओं के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। ठठेरी बाजार व बाटा गली में बनी गुफा के पास भक्तों की लंबी-लंबी कतारें देखी गईं। गुड़ मंडी के निकट पंडाल के पास की झालरयुक्त रोडलाइट श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। वहीं दुर्गा पूजा महोत्सव के दौरान दूरदराज से आए व्यापारियों ने दुकानें लगाकर अच्छा मुनाफा कमाया।