सुल्तानपुर। शासन के आदेश पर जिले में 50 से कम संख्या वाले बच्चों को नजदीकी विद्यालय में विलय की प्रक्रिया चल रही है। अभी तक 14 ब्लॉक और नगर क्षेत्र के 114 विद्यालयों को विलय किया गया है।
शिक्षक संगठन व ग्राम प्रधान इसका विरोध कर रहे हैं। कहीं-कहीं अभिभावक भी इसके खिलाफ है। अभिभावकों का कहना है कि गांव का विद्यालय बंद होने से बच्चों को दूर जाना पड़ेगा। बृहस्पतिवार को इसका जायजा लिया गया, तो रसोइयों की नौकरी सहित तमाम व्यावहारिक दिक्कतें भी सामने आईं।
दो रसोइया की नौकरी पर संकट
भदैंया (सुल्तानपुर)। उच्च प्राथमिक विद्यालय, पतीपुर का गांव के ही प्राथमिक में विलय कर दिया गया है। उच्च प्राथमिक विद्यालय, पतीपुर में 31 बच्चों के लिए दो शिक्षक व दो रसोइया तैनात हैं। प्राथमिक विद्यालय में 85 बच्चों के लिए एक प्रधानाध्यापक, तीन शिक्षक, एक शिक्षा मित्र, तीन रसोइया सहित पूरा स्टाफ है।
यहां मात्र दो कमरे हैं, जिसमें एक आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित है। ऐसे में बच्चों की संख्या बढ़ने पर बच्चों के बैठने में समस्या होगी। छात्र संख्या के हिसाब दो रसोइया को अपनी नौकरी से हाध धोना पड़ेगा।
प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश उपाध्याय ने सरकार की इस प्रक्रिया को अनुचित बताया है। खंड शिक्षा अधिकारी अरविंद कुमार यादव ने बताया कि 50 से कम बच्चों वाले विद्यालयों की सूची शासन को भेजी गई है। इसके तहत विद्यालयों का विलय किया जा रहा है।
ग्रेंट कुड़वार में मात्र 12 बच्चे
कुड़वार (सुल्तानपुर)। प्राथमिक विद्यालय ग्रेंट कुड़वार में कुल 12 बच्चे नामांकित हैं। बृहस्पतिवार को विद्यालय में 11 बच्चे उपस्थित मिले। प्रधानाध्यापक पुष्पा मिश्रा का स्थानांतरण कंपोजिट विद्यालय कुड़वार में हो गया है। वर्तमान में सहायक अध्यापक रागिनी विद्यालय की एक मात्र शिक्षिका हैं। कम संख्या वाले विद्यालयों के विलय की जानकारी मिलने पर अभिभावकों, प्रधान, विद्यालय प्रबंध समिति ने विरोध जताते हुए असहमति पत्र खंड शिक्षा अधिकारी को दिया है। कक्षा-चार की राधिका और जिगर ने कहा कि दूसरे विद्यालय में जाने में परेशानी होगी। कक्षा-पांच के छात्र लवकेश ने कहा कि नजदीक के प्राथमिक विद्यालय लोरिकपुर, हरखपुर और बचनपुर हैं। इनकी दूरी गांव से डेढ़ से दो किमी है।
समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जा रहा
स्कूल विलय में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। खंड शिक्षा अधिकारियों को छात्रों, अभिभावकों की समस्याओं की जानकारी के साथ ही निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं।
-उपेंद्र गुप्ता, बेसिक शिक्षा अधिकारी