दिन में करीब 11 बजे पारेषण का 63 एमवीए का पावर ट्रांसफार्मर बंद होते ही आपूर्ति नहीं मिलने से वितरण खंड के 16 उपकेंद्र ठप हो गए।
तीसरे चरण के चुनाव के दौरान ही बिजली जाने से जिले में हाहाकार मच गया है। जिले की 16 लाख आबादी के सामने पानी का संकट खड़ा हो गया है।
पारेषण के साथ कंपनी के इंजीनियर सुबह से ही फॉल्ट ढूंढने में जुटे हैं लेकिन देर शाम तक उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से संकट आगे भी बने रहने की आशंका है।
एक दिसंबर को आई आंधी पानी में पयागीपुर स्थित पारेषण 400 केवी उपकेंद्र परिसर में स्थापित 132 केवी उपकेंद्र का 63 एमवीए का एक पावर ट्रांसफार्मर खराब हो गया था।
इसकी वजह से 132 केवी के 63 एमवीए के दूसरे पावर ट्रांसफार्मर से एक दिसंबर की शाम से ही वितरण के 16 उपकेंद्रों को रोस्टिंग में आपूर्ति दी जा रही थी।
पांच दिन पूर्व खराब पावर ट्रांसफार्मर अभी बन नहीं पाया था कि शनिवार को टेस्टिंग के दौरान दिन में करीब 11 बजे दूसरा पावर ट्रांसफार्मर भी बैठ गया। इसके साथ ही वितरण खंड के 16 उपकेंद्रों की बिजली आपूर्ति बंद हो गई है।
इससे कादीपुर तहसील को छोड़ बाकी शहर समेत पूरे जिले की आपूर्ति ठप हो गई है। पारेषण की खराबी की चपेट में जिले की करीब 16 लाख की आबादी आ गई है। आपूर्ति ठप होते ही जिले में हाहाकार मच गया है।
शहर की दो लाख की आबादी के सामने सर्वाधिक संकट पानी का खड़ा हो गया है। हालांकि खराबी आते ही पारेषण के साथ कंपनी के इंजीनियर भी पावर ट्रांसफार्मर की खराबी ढूंढने में जुट गए हैं लेकिन शाम तक उन्हें सफलता नहीं मिल सकी।
दूसरे ट्रांसफार्मर की खराबी में भी पारेषण के इंजीनियरों की लापरवाही सामने आ रही है। वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से बिजली का संकट आगे भी बरकरार रहने की उम्मीद है। इसकी जानकारी मिलते ही लोगों को पानी आपूर्ति की चिंता सता रही है।
एक्सईएन एसएन द्विवेदी कुछ बताने से बचते रहे। अधीक्षण अभियंता कपिल देव का कहना है कि फॉल्ट ढूंढने की कोशिश में इंजीनियर लगे हैं। कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। फॉल्ट दूर होने पर उपकेंद्रों को आपूर्ति दी जाएगी।