जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में अव्यवस्थाओं की भरमार है। विद्यालयों में झाड़-झंखाड़ एवं कूड़ा-करकट जमा है। छात्राओं को ठंड के मौसम में तख्त की बजाय फर्श पर सोने को मजबूर होना पड़ रहा है जबकि कई विद्यालयों में शुद्ध पेयजल तक मयस्सर नहीं है। यही नहीं विद्यालयों में सुरक्षा के भी मुकम्मल इंतजाम नहीं है। डंडे के सहारे एक चौकीदार पर 100 छात्राओं की सुरक्षा का जिम्मा है।
दूषित पेयजल पी रहीं छात्राएं
कुड़वार। विकासखंड मुख्यालय पर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में पंजीकृत 100 छात्राओं में से शुक्रवार को 70 उपस्थित मिलीं। विद्यालय में स्थित हैंडपंप दूषित पानी दे रहा है। छात्राओं को मजबूरन दूषित पानी पीना पड़ रहा है। 33 तख्त विद्यालय में मौजूद हैं, जिन पर 100 छात्राएं सो नहीं पाती हैं। कई छात्राओं को फर्श पर सोने को मजबूर होना पड़ रहा है। विद्यालय में विद्युत वायरिंग खराब होने पर वैकल्पिक व्यवस्था से काम चलाया जा रहा है। वार्डन लीला देवी ने बताया कि विद्यालय की इमारत दो मंजिला बननी थी लेकिन एक ही बनी है। ऊपर की मंजिल पर सिर्फ पिलर ही खड़े हुए हैं।
फर्श पर सोने को मजबूर छात्राएं
विंदेश्वरीगंज। बल्दीराय विकासखंड मुख्यालय पर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में हैंडपंप खराब है। छात्राओं को बगल के बीआरसी में लगे हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है। स्कूल में केवल 20 तख्त ही मौजूद हैं। इससे अधिकतर छात्राओं को फर्श पर सोने के लिए मजबूर होना पड़ता है। शुक्रवार को पंजीकृत 100 छात्राओं में से 75 उपस्थित रहीं। केवल फुल टाइम टीचर सरिता श्रीवास्तव विद्यालय में मौजूद थीं। बाकी लोग नदारद रहे। परिसर में झाड़-झंखाड़ जमा हैं जिससे जहरीले जंतुओं के निकलने का खतरा बना रहता है। यहां भी छात्राओं की सुरक्षा का जिम्मा एकमात्र चौकीदार पर है। विद्यालय की बाउंड्रीवाल दरक गई है। दो दिन से सफाई कर्मी के नहीं आने से साफ-सफाई की व्यवस्था बदहाल है। विद्युतीकरण की व्यवस्था है। बिजली न रहने पर इनवर्टर एवं जनरेटर चलाया जाता है।
नहीं खेलकूद की जगह
कूरेभार। स्थानीय विकासखंड में स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की इमारत नई है। शुक्रवार को पंजीकृत 100 छात्राओं में सभी मौजूद रहीं। इस विद्यालय में खेलकूद के लिए स्थान न होने से छात्राओं को कमरे में ही रहना पड़ता है। विद्यालय में इमारत के सामने जगह कम होने से छात्राओं को खेलकूद की सुविधा नहीं मिल पा रही है। चौकीदार के सहारे सुरक्षा व्यवस्था है। वार्डन मिथिलेश सिंह बताती है कि पहले पुरानी इमारत में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित था। नई बिल्डिंग मिलने के बाद छात्राओं की आवासीय सुविधा अच्छी हो गई है। किसी भी छात्रा के बीमार होने की स्थिति में उसे बगल स्थित सीएचसी में दिखाया जाता है।x