भदैंया। लखनऊ-वाराणसी हाईवे के हनुमानगंज बाईपास पर 43 करोड़ से बना रेलवे ओवरब्रिज तीन माह में बदहाल होने लगा। घटिया निर्माण कार्य के चलते रेलवे ओवरब्रिज पर बड़ा गड्ढा बन गया है। इससे पुल निर्माण में इस्तेमाल हुई सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
वर्ष 2015 में इस रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण की मंजूरी मिलने के बाद वर्ष 2016 में पुल का निर्माण शुरू हुआ था। इसी दौरान सड़क फोरलेन के बजाय सिक्स लेन में तब्दील कर दी गई। इसके बाद एनएचएआई को रेलवे से सिक्स लेन की अनुमति लेने में दो वर्ष लग गए। वर्ष 2019 में रेलवे से निर्माण की मंजूरी मिलने के बाद 2020 में 1.26 किमी लंबे रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण शुरू हुआ। पुल के निर्माण के लिए अप्रैल 2022 की समय सीमा तय थी, लेकिन पिछली जुलाई महीने में यह पूरा हो सका।
इसके बाद 15 जुलाई को पुल पर आवागमन शुरू किया गया। पुल पर आवागमन शुरू होने के डेढ़ महीने बाद ही इसकी एक पटरी धंस गई थी। अब पुल की सड़क क्षतिग्रस्त होने से बड़ा गड्ढा बन गया है। बीते शुक्रवार को वाराणसी से बरेली जा रहे बाइक सवार सुधीर बंसल गड्ढे में फंसकर चोटिल हो गए थे। एनएचएआई के सहायक परियोजना प्रबंधक प्रवीण कुमार कटियार ने बताया कि आरओबी व सड़क निर्माण की 10 साल की मेंटेनेंस गारंटी है। जहां सड़क धंसी थी, उसे ठीक किया गया है। पुल पर बने गड्ढे की जानकारी नहीं है। उसे भी ठीक कराया जाएगा।