सुल्तानपुर। कोर्ट के आदेश पर शासन की ओर से जलस्रोतों में शामिल तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने के अभियान को अधिकारियों ने ठेंगा दिखा दिया है। शासन का शिकंजा कसा तो अफसरों ने झूठी रिपोर्ट भेज दी।
इसमें शहर से लेकर देहात तक के अवैध कब्जे को अधिकारियों ने 294 प्रकरणों को छोड़कर शेष को नकार दिया है। अधिकारियों की रिपोर्टों को शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक सार्वजनिक स्थलों पर हुए अवैध कब्जे झुठला रहे हैं।
जिले में स्थिति यह है कि शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक के तालाबों पर सैकड़ों जगहों पर इमारतें खड़ी हैं। अफसर जानते हुए भी इन पर अभी तक कार्रवाई नहीं कर सके हैं। नतीजा यह हुआ कि राजस्व विभाग के आंकड़ों में दर्ज तालाबों का अस्तित्व ही समाप्त होता जा रहा है।
तालाबों के समाप्त होते अस्तित्व से भूगर्भ जलस्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है। कहा जा रहा है कि यदि तालाबों का अस्तित्व समाप्त हुआ तो लोगों को पेयजल की बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
राजस्व विभाग के आंकड़ों की मानें तो जिले की पांचों तहसीलों में 20,961 तालाब दर्ज हैं। ये तालाब वर्षों पुराने हैं। प्रशासन की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट की मानें तो इसमें 20,191 तालाबों पर अवैध कब्जा हुआ ही नहीं है।
तहसीलों से आई रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ 770 तालाबों पर अवैध कब्जा दिखाया गया था। इसके खिलाफ अभियान चलाकर तहसील के अधिकारियों ने 476 तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने का दावा किया है।
शेष 294 तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया जारी रहने की बात कही गई है। शासन को भेजी गई अधिकारियों की ये रिपोर्ट शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक मशहूर तालाबों पर अवैध कब्जा करके बनाई गईं इमारतें ही झुठला रही हैं। जबकि इन मशहूर तालाबों पर अवैध कब्जा करके भवनों का निर्माण करने की कोशिश बेरोकटोक जारी है।
शहर के राहुल टॉकीज के पीछे वर्षों पुराना सातों तलैया के नाम से मशहूर तालाब था। तालाब बड़े भू-भाग में फैला था। बुुजुर्गों की मानें तो इस तालाब में काफी एरिया का बारिश का पानी एकत्र होता था।
काफी गहरा तालाब होने की वजह से इसका पानी साल भर सूखता नहीं था। अब इसकी स्थिति बदल गई है। इस तालाब पर दो दशक से अवैध कब्जा किया जा रहा है। स्थिति यह है कि लोगों ने आवासीय भवन बनाकर आधे से अधिक तालाब पर कब्जा कर लिया है। अभी भी अवैध कब्जे की कोशिश जारी है।
शास्त्रीनगर में पुलिस चौकी के पास स्थित तालाब भी बड़े क्षेत्र में फैला था। इस तालाब में भी शास्त्रीनगर व आसपास के क्षेत्र का बारिश का पानी एकत्र होता था। धीरे-धीरे इसकी भी स्थिति बदल गई।
चारों तरफ से तालाब पर अवैध कब्जा करके आवासीय व व्यावसायिक भवन बना लिए गये। तालाब पर अब भी अतिक्रमण की कोशिश जारी है। स्थिति यह है कि तालाब का क्षेत्रफल सिकुड़कर काफी कम हो गया है।
कुड़वार कस्बे में सड़क के किनारे स्थित तालाब राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। मौजूदा समय में तालाब के उत्तरी छोर पर सड़क के किनारे लोगों ने अवैध कब्जा करके भवन बना लिए हैं।
तालाब के दक्षिणी छोर पर भी कब्जा करके भवन बना लिए गए हैं। दोनों तरफ भवन बनने से तालाब का क्षेत्रफल सिकुड़ गया है। धीरे-धीरे तालाब का अस्तित्व समाप्त होता जा रहा है।
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व/प्रभारी मुख्य राजस्व अधिकारी उमाकांत त्रिपाठी ने कहा कि तालाब सार्वजनिक उपयोग की श्रेणी में आते हैं। तालाबों पर अवैध कब्जा नहीं किया जा सकता है। यदि ऐसा प्रकरण में प्रकाश में आया तो संबंधित एसडीएम व तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई होगी।