शहर में अभी नई पाइप लाइन योजना का विस्तार नहीं हो सका है। इस वजह से पुरानी पाइप लाइनों के जरिए ही मोहल्लों में पानी की सप्लाई की जा रही है। पुरानी पाइप लाइनें समय के साथ जर्जर हो चली हैं। सड़क के किनारे बिछाई गई पुरानी पाइप लाइनें अक्सर गाडिय़ों के आवागमन के दौरान भार पडने से टूट जाती हैं। इससे आए दिन वाटर सप्लाई लाइन का पानी सड़कों पर बहता रहता है। शहर में 25 वार्ड हैं।
जइन वार्डों में शुद्ध पेयजलापूर्ति का खाका जल निगम की ओर से तैयार किया गया है। जल निगम की ओर से दिसंबर माह तक नई पाइप लाइनों के लिंकअप का कार्य पूर्ण हो जाना था, लेकिन नोटबंदी के बाद से नवंबर महीने से पेयजलापूर्ति योजना का काम पूरी तरह से ठप हो गया। इस वजह से अभी भी पुरानी पाइप लाइन के जरिए पानी की आपूर्ति की जा रही है। शहर के विभिन्न स्थानों पर पाइप लाइनें क्षतिग्रस्त हो रही हैं।
कुछ दिनों पहले शहर के कुड़वार नाका, एमजीएस चौराहा, बढ़ैयावीर मोहल्ले की पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे सप्लाई का पानी सड़क पर बहने लगा था। मोहल्ले के लोगों की शिकायत पर नगर पालिका की ओर से संविदा कर्मियों के जरिए पाइप लाइन की मरम्मत करवाई गई। पालिका के अधिकारियों का कहना है कि जल निगम ने नई सप्लाई लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया है। वर्षों पुरानी पाइप लाइनों से सप्लाई करने में बाधा आ रही है। मरम्मत करने के कुछ दिनों बाद ही पाइपें फिर टूट जाती हैं।
जल निगम के अधिशाषी अभियंता पीसी शुक्ला का कहना है कि नोटबंदी व आचार संहिता लगने के बाद से लक्ष्य के मुताबिक कार्य प्रगति पर नहीं आ सका है। शहर में नई पाइप लाइनों के जरिए आपूर्ति करने में अभी डेढ़ माह का वक्त लगेगा।