आशा बहुओं की बेमियादी हड़ताल ने रविवार को आयोजित पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान पर खासा असर डाला। आशा बहुओं के असहयोग से जहां तकरीबन बूथों पर सन्नाटा पसरा रहा वहीं लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 50 हजार बच्चों को ही जिंदगी की दो बूंद पिलाई जा सकी। यह स्थिति तब रही जब अभियान को सफल बनाने के लिए जिले में न सिर्फ 892 बूथ बनाए गए थे बल्कि 24 ट्रांजिट टीमों के साथ बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी।
पोलियो जैसी घातक बीमारी को समाप्त करने के लिए स्वास्थ्य महकमे की ओर से रविवार को पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान शुरू किया गया था। अभियान में 3,06,240 बच्चों को ड्रॉप पिलाई जा सके इसके लिए विभाग ने 892 बूथों के साथ ही 593 टीमें गठित कर बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मी तैनात किए थे। हालांकि आशा बहुओं की बेमियादी हड़ताल ने सारे किए कराए पर पानी फेर दिया।
आशा बहुओं की हड़ताल से न सिर्फ केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहा बल्कि पहले दिन के लिए लक्षित 1,05,057 बच्चों में मात्र पचास हजार बच्चों को ही जिंदगी की दो बूंद पिलाई जा सकी। रविवार को चिकित्साधिकारी डॉ. एके गुप्ता, चिकित्सक डॉ. पीतांबर कनौजिया, डॉ. राजीव टंडन व डॉ. राकेश सक्सेना ने संयुक्त जिला चिकित्सालय पर नवजात शिशुओं को पोलियो की खुराक पिलाकर अभियान की शुरुआत की।