सुल्तानपुर। बाराबंकी जिले के कोठी थाने में बेजा हिरासत में रखे गए पति को छुड़ाने गई महिला को थाने में जिंदा जला देने की घटना ने सुल्तानपुर जिले की पुलिस के दागदार चेहरे की याद भी ताजा कर दी है। यहां पांच वर्षों के दौरान लॉकअप में पांच लोगों की मौत हो चुकी है जबकि पूछताछ के नाम पर कई दिनों तक निर्दोष को थाने पर बैठाए रखना और मानवाधिकार का हनन आम बात है। किसी बड़ी घटना के होने पर लोगों को उठाकर वसूली करने के आरोप भी पुलिस पर लगते रहते हैं।
केस-1
22 अक्तूबर 2010 को ऐसी ही एक घटना कुड़वार थाने में हुई थी। कुड़वार के तत्कालीन एसओ मुस्तकीम चौहान ने भैंस चोरी के मामले में आरोपी बनाए गए दहलवा थाना कूरेभार निवासी मनगू की हवालात में बंद कर जमकर पिटाई की थी। पुलिस पिटाई से मनगू की मौत हो गई थी। उसकी मौत के बाद जिले में कई दिनों तक बवाल चला।
केस-2
18 जुलाई 2011 को बाबा की पिटाई के आरोप में धनपतगंज गांव से लाए गए युवक संदीप श्रीवास्तव को कूरेभार थाने की पुलिस ने इस कदर पीटा की दूसरे दिन घर में उसकी मौत हो गई। परिवारीजनों ने सड़क जाम कर पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
केस-3
कूरेभार थाने के जूड़ापट्टी गांव निवासी ट्रैफिक पुलिस के रिटायर्ड सिपाही रामरूप मिश्र की हाल ही में दबिश के दौरान मौत हो गई थी। परिवारीजनों ने पुलिस पर हत्या करने का आरोप लगाया था। मामले में तत्कालीन जीआरपी एसओ ज्ञान प्रकाश तिवारी के खिलाफ कूरेभार थाने में गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था।
केस-4
इनसेट
गोसाईगंज थाना क्षेत्र के बरुई गांव निवासी महेंद्र सिंह पुत्र प्रसिद्ध नारायण सिंह की बीते दिनों गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने मृतक के पिता प्रसिद्ध नारायण की तहरीर पर बरुई गांव के अमरपाल सिंह, विनय सिंह, उग्रसेन सिंह और प्रदीप सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज किया था। बीते 16 जून को पुलिस ने प्रदीप सिंह के घर पर दबिश देकर उसकी बहन (छात्रा) को हिरासत में लेकर थाने लाई थी। पुलिस छात्रा को हिरासत में लेकर रामबरन महाविद्यालय रुपिनपुर विभारपुर में गृह विज्ञान की प्रयोगात्मक परीक्षा दिलाने पहुंची तो कॉलेज के प्रबंधक ने इस पर एतराज जताया था। छात्रा के परिवारीजनों के मुताबिक पुलिस ने उसे 48 घंटे से ज्यादा समय तक अभिरक्षा में रखा था।