सुल्तानपुर। कोरोना काल में बहुत से बच्चों के सिर से मां का साया छिन गया है। ऐसे बच्चों के पिता पर अब दोहरी जिम्मेदारी आ गई है। पिता के साथ-साथ मां की कमी को भी पूरा करने की कोशिश करनी है। फादर्स डे पर कुछ ऐसे ही पिता से ‘अमर उजाला’ ने बात की तो उनका दर्द छलक उठा।
तीन बच्चों की जिम्मेदारी निभा रहे डॉ. एसपी मिश्र
परिषदीय विद्यालय में बतौर शिक्षिका कार्यरत रहीं डॉ. रागिनी मिश्रा का दो मई को कोरोना की वजह से निधन हो गया था।
डॉ. रागिनी के पति डॉ. एसपी मिश्र गनपत सहाय पीजी कॉलेज में प्राणि विज्ञान विभाग के अध्यक्ष हैं। इनके दो बेटियां और एक बेटा है। बड़ी बेटी 23 वर्षीय कृतिका, 20 वर्षीय दूसरी बेटी विभूति व सबसे छोटा बेटा एकर्ष मिश्र है।
तीनों संतानें अध्ययनरत हैं। पत्नी के निधन से एसपी मिश्र के ऊपर दोहरी जिम्मेदारी आ गई है। वे कहते हैं कि मां की कमी तो पूरी नहीं की जा सकती लेकिन बच्चों के साथ ज्यादा समय अब देना पड़ रहा है।
आ गई परिवार की जिम्मेदारी
कमला नेहरू भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान संस्थान में बर्सर (कोषाध्यक्ष) के पद पर कार्यरत अनिल कुमार सिंह की पत्नी साधना सिंह का निधन कोरोना महामारी से 16 अप्रैल को हो गया था। साधना सिंह जीवित रहते परिवार की सारी जिम्मेदारी खुद निभाती थीं।
उनके निधन के बाद अब अनिल सिंह को पूरी जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है। दो पुत्र राहुल सिंह और रोहित सिंह के साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों की देखभाल का जिम्मा अब उन्हीं के ऊपर है। अनिल सिंह कहते हैं कि बच्चों से मां का लगाव अलग ही होता है। उसे पूरा नहीं किया जा सकता है लेकिन हर संभव कोशिश है कि बच्चों के लिए बेहतर कर सकूं।
चार बच्चों की परवरिश का जिम्मा
गोसाईगंज क्षेत्र के हयातनगर निवासी आशुतोष शर्मा की पत्नी प्रतिमा शर्मा का निधन कोरोना की वजह से हो गया था। ब्यूटी पार्लर चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाली प्रतिमा के निधन से चार बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी अब आशुतोष पर आ गई है। साथ ही मां व पिता की जिम्मेदारी भी वहन करनी है। आशुतोष कहते हैं कि छोटे बच्चों के पालन-पोषण में तमाम समस्याएं सामने आती हैं।