अमेठी व सुल्तानपुर में प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
विभिन्न मांगों को लेकर राजकीय नर्सेज संघ की स्थानीय इकाई व स्वास्थ्य कर्मचारियों की मंगलवार से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल के पहले ही दिन जिला अस्पताल की चिकित्सीय व्यवस्था चरमरा गई। दवा कक्ष में ताला लगाकर फार्मासिस्ट व कर्मचारी हड़ताल में कूद पड़े। दूर-दराज से पहुंचे मरीजों को लेकर तीमारदार दर-दर की ठोकरें खाते दिखे लेकिन किसी को तरस नहीं आया। कई मरीजों को चिकित्सकों ने भी नहीं देखा।
कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में होने वाली हड़ताल में मंगलवार से राजकीय नर्सेज संघ भी शामिल हो गया। इसकी वजह से स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ठप हो गईं। जिला अस्पताल के फार्मासिस्ट व कर्मचारी भी दवा वितरण कक्ष में ताला लगाकर हड़ताल में शामिल हो गए। एक तरफ बैनर लगाकर कर्मचारी हमारी मांगें पूरी हो चाहे, जो मजबूरी हो का नारा बुलंद कर रहे थे जबकि दूसरी तरफ मरीज फर्श पर बेसुध और बेहाल पड़े थे।
मंगलवार की हड़ताल का असर चिकित्सकों पर भी देखने को मिला। सोमवार को लंभुआ कोतवाली क्षेत्र के अर्जुनपुर निवासी राधेश्याम गुप्ता के 13 वर्षीय बेटे कुलामल चंद्र गुप्ता को परिवारीजन लेकर जिला अस्पताल पहुंचे थे। जांच में डेंगू पॉजिटिव की पुष्टि होने के बाद उसे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। परिवारीजनों के मुताबिक सोमवार को चिकित्सक उसे देखने पहुंचे थे लेकिन मंगलवार को कोई उसकी खोज-खबर लेने नहीं पहुंचा।
मंगलवार को जिला अस्पताल पहुंचे निशक्त जय प्रकाश को यूरिन में परेशानी थी। हड़ताल के चलते ओपीडी में ताला लगा था। चिकित्सक भी नदारद थे। इस वजह से उसे भी परेशानी उठानी पड़ी। प्रतापगढ़ जिले से पहुंचे शैलेश (15) को बुखार था। चिकित्सक ने उसे इमरजेंसी में देखा और दवाएं भी लिखी लेकिन दवा वितरण कक्ष बंद होने से उसे बाहर से दवाएं लेनी पड़ी। नर्सेज संघ के हड़ताल में शामिल होने की वजह से जिला अस्पताल में पूरी तरह से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई। हालांकि प्रभारी सीएमएस डॉ. वाईके दुबे पल-पल पर नजर रखे हुए थे। प्रभारी सीएमएस ने इमरजेंसी वार्ड में चिकित्सकों से जानकारी लेते रहे।