परिवहन विभाग की ओर से एक अक्तूबर से ऑनलाइन ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जाने का फरमान दलालों के दखल से संभव होता नहीं दिख रहा है। ऑनलाइन आवेदन के बाद भी आवेदकों को लर्निंग व परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस का टेस्ट देने के लिए एआरटीओ ऑफिस के चक्कर काटने पड़ेंगे। ऑनलाइन टेस्ट में पास होने के लिए आवेदकों को दलालों का सहारा लेना पड़ेगा। फिलहाल लाइसेंस प्रणाली के हाईटेक होने से अब फर्जीवाड़े में कमी की उम्मीद जताई जा रही है।
विभाग ने एआरटीओ ऑफिस परिसर में ही ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक का निर्माण कराया है। इसमें आवेदकों को वाहन चलाकर टेस्ट देना पड़ता है। इतना होने के बाद भी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने में फर्जीवाड़ा नहीं रुक पाया। दलालों की नेटवर्किंग के सहारे ही ज्यादातर लोग डीएल बनवा पाते हैं। इसको देखते हुए परिवहन विभाग ने लाइसेंस प्रणाली को और हाईटेक बनाकर ऑनलाइन टेस्ट लेने की व्यवस्था करा दी है। आरआई के कक्ष में कंप्यूटर लगाकर ऑनलाइन टेस्ट लेेने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
स्मार्ट डीएल के लिए आवेदकों को कंप्यूटर के सामने बैठकर ऑनलाइन टेस्ट देना पड़ रहा है और परिसर में बने ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर दो पहिया व चार पहिया वाहन से अंग्रेजी का आठ बनाकर परीक्षा देनी पड़ती है। बीते दिनों परिवहन आयुक्त के. रवींद्र नायक ने एक अक्तूबर से ऑनलाइन ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का आदेश जारी किया है। परिवहन आयुक्त के आदेश के अमल में आ जाने से लोग डीएल के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। डीएल का आवेदन करने के लिए अब लोगों को एआरटीओ ऑफिस की भाग दौड़ नहीं करनी पड़ेगी।