विधानसभा मतदाता पुनरीक्षण अभियान के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल से व्यवस्था चरमरा गई है। अधिकांश आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बीएलओ बना देने से कार्यक्रम के दौरान पुुरानी मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य तकरीबन ठप हो गया है।
बूथों पर आंगनबाड़ी कर्मचारियों के नहीं रहने से पुनरीक्षण के विभिन्न फॉर्म भी नहीं भरवाए जा रहे हैं। प्रशासन अभी तक इसका कोई विकल्प नहीं ढूंढ पाया है। 15 सितंबर से केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने विधानसभा निर्वाचक नामावली का पुनरीक्षण अभियान शुरू किया है।
मतदाता पुनरीक्षण अभियान के लिए प्रशासन ने अधिकांश बूथों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बीएलओ बना दिया है। बीएलओ बनने के बावजूद दो सितंबर से आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ कार्य बहिष्कार व हड़ताल पर हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है।
इससे मतदाता पुनरीक्षण अभियान को झटका लगा है। कार्यक्रम के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कार्य नहीं कर रही हैं। इसकी वजह से पुरानी विधानसभा निर्वाचक नामावली का सत्यापन कार्य ठप हो गया है। मतदाता सूची को दुरुस्त करने एवं फोटोयुक्त बनाने के लिए भरवाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के फॉर्मों का कार्य भी तकरीबन ठप है।
मतदाता सूची संशोधन, नए नाम बढ़ाने एवं नाम काटने व शिफ्ट करने के फॉर्म भी नहीं भरवाए जा रहे हैं। हालांकि दो दिन पूर्व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के एक गुट के हड़ताल से अलग होने से प्रशासन को कुछ राहत मिली है। इसके बाद भी निर्वाचन कार्य पूरी तरह से पटरी पर नहीं आ सका है।
सहायक निर्वाचन अधिकारी हरिश्चंद्र श्रीवास्तव ने स्वीकार किया कि हड़ताल से पुनरीक्षण कार्यक्रम प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि अभी पुनरीक्षण कार्यक्रम 30 अक्तूबर तक चलना है। प्रशासन को इसकी जानकारी है। हड़ताल खत्म नहीं होने पर कुछ विकल्प तलाशा जाएगा।