सुल्तानपुर। धोखाधड़ी कर बेशकीमती जमीन का नामांतरण कराने व बेचने सहित अन्य आरोपों से जुड़े मामले में जयसिंहपुर की नायब तहसीलदार व सब रजिस्ट्रार सहित नौ लोगों के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में दी गई अर्जी पर शुक्रवार संबंधित अधिकारियों की आख्या नहीं आने से सुनवाई बाधित रही। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नवनीत सिंह की अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब कर मामले में सुनवाई के लिए 29 सितंबर की तारीख तय की है।
जयसिंहपुर के बिरसिंहपुर निवासी अभियोगी रामप्रकाश सिंह ने 15 जुलाई की घटना बताते हुए सीजेएम कोर्ट में अर्जी दी है। अभियोगी के मुताबिक बिरसिंहपुर निवासी उनके नाना राम औतार सिंह के एक पुत्र कमला प्रसाद सिंह व एक पुत्री राधिका सिंह (अभियोगी की मां) हैं। नाना की मृत्यु के बाद उनके मामा कमला प्रसाद सिंह के नाम जमीन दर्ज हुई। उनके मामा अविवाहित रहे। आरोप है कि उनकी संपत्ति को हड़पने के लिए गांव की मिथिलेश सिंह व अन्य लोगों ने षड्यंत्र रचा।
आरोप है कि उनके मामा की मृत्यु के छह साल बाद मिथिलेश सिंह की मां भागीरथी की मृत्यु हुई थी। उन्होंने कभी भी कमला प्रसाद सिंह की बहन होने का दावा नहीं किया था। बावजूद इसके मिथिलेश सिंह ने संपत्ति हड़पने के लिए अपनी मां भागीरथी को कमला प्रसाद की सगी बहन होने का झूठा दावा किया था। मिथिलेश सिंह की मृत्यु के बाद उनकी पुत्री ने गलत तरीके से अपने पति, ससुर व अन्य लोगों का नाम खतौनी में दर्ज करा लिया था। नाम दर्ज होने के दूसरे दिन 64 लाख रुपये दिखाकर बैनामा कर दिया गया।
अभियोगी ने उपनिबंधक व अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई है। अभियोगी के मुताबिक उनकी मां राधिका सिंह के पास कमला प्रसाद सिंह की सगी बहन होने के कई अभिलेखीय साक्ष्य मौजूद हैं। कोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए तहसील जयसिंहपुर के उच्चाधिकारियों व पुलिस से नियत तिथि तक अपनी रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।