एचआईवी पॉजिटिव की संख्या में इजाफा होने के बावजूद जिले का स्वास्थ्य महकमा एड्स जैसी जानलेवा बीमारी को लेकर संजीदा नहीं है। जनजागरूकता के तमाम दावों के बाद भी प्रतिमाह जिले में पांच नए एचआईवी पॉजिटिव मिलने का औसत है। जिला अस्पताल में बना आईसीटीसी सेंटर काफी छोटा है। यहां काउंसलिंग करने और कराने वालों को परेशानी उठानी पड़ती है।
एड्स की रोकथाम के लिए जिला अस्पताल में आईसीटीसी सेंटर हैं। सेंटर में परामर्शदाता सत्य नारायण सिंह के साथ ही एलटी नेहा श्रीवास्तव की तैनाती है। बेहद छोटे से कमरे में संचालित इस सेंटर में एड्स पीड़ित मरीजों की काउंसलिंग करने में जहां परामर्शदाता को असुविधा होती है वहीं मरीजों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। जिला अस्पताल में ही एड्स पीड़ित मरीजों को दवा देने के लिए एआरटी सेंटर खुला है। एआरटी सेंटर में सुमन प्रजापति काउंसलर है। इसके साथ ही स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, टाटा मैनेजर और एलटी का पद सृजित है।
सभी पदों पर लोग काम कर रहे हैं। जिला महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए दीपशिखा काउंसलर के पद पर तैनात है। दीपशिखा एड्स पीड़ित महिलाओं को जागरूक करती हैं। नेशनल एड्स कंट्रोल सोसाइटी की ओर से जिला अस्पताल के ब्लड बैक में काउंसलर अनुराग पांडेय, एलटी, सहायक के साथ ही एक चालक हैं।
इनसेट
हाथ मिलाने से नहीं होता एड्स
सुल्तानपुर। जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर की काउंसलर सुमन प्रजापति बताती हैं कि एचआईवी संक्रमण सामान्य संपर्क से नहीं होता। जैसे घर व ऑफिस में साथ रहने और हाथ मिलाने से इसका संक्रमण नहीं होता। यह संक्रमण रक्त या शरीर के अन्य द्रव्यों के एक-दूसरे में मिल जाने से होता है।