कोहरे और पछुआ हवा की जुगलबंदी से ठंड शबाब पर पहुंच गई है। कड़ाके की ठंड ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। अब तक ठंड से बचाव की प्रशासनिक तैयारियां मुकम्मल नहीं हो सकी हैं। सार्वजनिक स्थलों पर न अलाव जलाए गए हैं न ही गरीबों को कंबल वितरित किया जा सका है। गरीब और असहाय कागज जलाकर ठंड दूर करने की जद्दोजहद में लगे हैं।
बीते एक सप्ताह से ठंड ने जोर पकड़ लिया है। गलन भरी सर्दी से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। प्रशासनिक स्तर पर अब तक अलाव जलाने की व्यवस्था नहीं की गई है। न ही गरीबों को कंबल बांटे गए हैं। गरीबों की सुविधा के लिए बनाए गए रैन बसेरों की दशा भी ठीक नहीं है।
वहां भी कंबल और बिस्तर का इंतजाम नहीं किया गया है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों के बिस्तर और कंबल की व्यवस्था भी औपचारिकता तक सीमित है। हालत यह है कि प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से अभी तक अलाव के लिए स्थान तक नहीं चिह्नित हुए हैं।