ऐसे हालात रहे तो प्रभावित होगी धान की रोपाई
जून माह के लिए निर्धारित की गई 87.30 मिली बारिश के सापेक्ष महज 36.50 मिमी बारिश हुई है। मानक से कम बारिश होने से किसानों की उम्मीदें टूटने लगी है। पानी के अभाव में किसानों के खेत मेें डाली गई धान की नर्सरी सूखने लगी है। जुलाई में भी बारिश के यही हालात रहे तो धान की रोपाई चौपट हो जाएगी। ऐसे में धान के उत्पादन पर ग्रहण लग सकता है।
जून में जिले में मानसून के दस्तक देने से बारिश शुरू हो गई थी। कई दिन बारिश हुई तो किसान खुश नजर आ रहे थे। किसानों ने अपने खेतों में धान की नर्सरी डाल दी थी जबकि कई इलाकों में मौसम अनुकूल पाकर किसान ने धान की रोपाई के काम में तेजी ला दी थी। मौसम विभाग की ओर से पिछले साल की अपेक्षा इस बार अधिक बारिश होने का अनुमान लगाने से किसानों ने अपने खेतों में अधिक रकबा में धान की रोपाई कराने की योजना तैयार कर ली थी।
इस दौरान कुछ दिनों तक बारिश होने के बाद मानसून कमजोर पड़ गया। मानसून के दगा देने से किसान परेशान हो गए हैं। जून के लिए 87.30 मिमी मानक बारिश निर्धारित की गई है। इसके सापेक्ष जून में महज 36.50 मिमी बारिश हुई है। ऐसा ही चलता रहा तो खरीफ की मुुख्य फसल धान की रोपाई का काम प्रभावित हो जाएगा। ऐसी हालात में धान के उत्पादन पर भी ग्रहण लगना संभव है।