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70 साल में कोई प्रधानमंत्री अनुच्छेद 370 हटाने का नहीं जुटा सका साहस:मेनका

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सुल्तानपुर। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थन करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद मेनका संजय गांधी ने बड़ा बयान दिया है। ब्लॉक भदैंया के महेसुआ में लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने पूर्व की सरकारों को घेरा।
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कहा कि 70 वर्षों में जम्मू-कश्मीर से कोई प्रधानमंत्री अनुच्छेद 370 हटाने का साहस नहीं जुटा सका। उन्होंने एक देश में दो कानून और दो संविधान के बारे में समझाया। कहा कि यह किसी भी तरह उचित नहीं था।
सांसद ने कहा कि हिंदुस्तान में लागू होने वाला कानून जम्मू-कश्मीर पर नहीं लागू होता था। वहां की अपनी पुलिस होती थी। हिंदुस्तान में जहां विवाह की उम्र 18 से 21 वर्ष है वहीं, कश्मीर में नौ वर्ष की बच्चियों का विवाह करके उनके जीवन को बर्बाद किया जा रहा था।
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कश्मीर में पिछले 70 वर्षों में चले संघर्ष में 46,000 से अधिक लोग मारे गए। कश्मीरी पंडितों को वहां से भगा दिया गया। उनकी जमीनों पर कब्जा कर लिया गया। कश्मीर पर तीन परिवारों का राज था।
सभी बारी-बारी से सत्ता में रहे। कहा कि पं. नेहरू की सरकार ने आजादी के बाद अनुच्छेद 370 को अस्थाई रूप से लागू किया था। उस समय इसे कुछ दिनों में हटाने की बात कही गई थी लेकिन 70 सालों में उसे हटाया नहीं गया।
कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि अनुच्छेद 370 से वहां पर शांति कायम नहीं हो सकी। विकास नहीं हो सका। लोगों को रोजगार नहीं मिला।
देश के 160 कानून वहां लागू नहीं होते थे तो उसका क्या औचित्य? कहा कि प्रधानमंत्री ने बड़े सलीके से बिना शोर मचाए व बिना लड़ाई-झगड़े के 370 को हटाकर कश्मीर की जनता के साथ बड़ा न्याय किया है।
आजादी के 70 साल बाद एक देश एक संविधान और एक कानून बना है। इसके लिए सबको पीएम मोदी को मुबारकबाद देना चाहिए। देश एक करने के लिए साहसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोग याद करेंगे।
उन्होंने कश्मीर में सत्तासीन रहे तीनों परिवारों को घेरा। कहा कश्मीर के विकास में अटल बिहारी बाजपेयी की केंद्र सरकार की ओर से भेजे गए पर्यटन क्षेत्र के बजट से सत्ताधारी तीन परिवारों ने अपने बड़े-बड़े मकान बना लिए। उन्होंने कश्मीरियों के विकास पर कभी ध्यान नहीं दिया।
केंद्र सरकार की ओर से भेजे गए पैसों की मंत्री से लेकर प्रशासन तक ने लूट की। विपक्षियों की ओर से अनुच्छेद 370 पर उठाए जा रहे सवाल पर उन्होंने कहा कि कश्मीर में केंद्र सरकार की सख्ती शांति व सुरक्षा के मद्देनजर है।
कश्मीर की सत्ता में रह चुके कुछ परिवार वहां लोगों को भड़का कर अशांति पैदा करके अपनी दुकान चलाना चाहते हैं। जिनसे वहां शांति को खतरा है उनके विरुद्ध ही कार्रवाई की गई है। देश से अलग कानून होने की वजह से ही कश्मीर का विकास अवरुद्ध हो गया था।
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