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शुरू नहीं हुई जायस जमीन विवाद की जांच

Sun, 31 Jan 2016 10:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अमेठी
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बांदा-टांडा राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित जायस की जिस जमीन को लेकर इन दिनों अमेठी में सियासी संग्राम छिड़ा है उसमें प्रशासन की भूमिका खासी लचर है। केंद्रीय मंत्री से वादा करने के बाद भी अब तक जमीन के मालिकाना हक में हेराफेरी की जांच शुरू नहीं हो सकी है। आरटीआई में मांगी सूचना का जवाब भी गोलमोल है।
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 पखवारा भर पूर्व अमेठी के दौरे पर आईं केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट पर तिलोई तहसील के बहादुरपुर गांव में राजमार्ग किनारे स्थित कीमती जमीन हथियाने का आरोप लगाया था। इस मुद्दे पर आरोपों को सार्वजनिक करने के अलावा मंत्री ने डीएम को बुलाकर जमीन कब्जाने को लेकर किए गए छल कपट की निष्पक्ष जांच करवाकर जमीन को उसके पुराने स्वरूप में वापस करने का निर्देश दिया था। केंद्रीय मंत्री की सार्वजनिक बयानबाजी व प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद लोगों को लगा था कि जल्द ही मामले में कुछ खुलासा होगा। हालांकि केंद्रीय मंत्री के आदेश के बावजूद मामले में जिला प्रशासन की भूमिका खासी लचर है। आलम यह है कि प्रशासन ने जहां इस मुद्दे पर अधिवक्ता उमाशंकर पांडेय की ओर से मांगी गई आरटीआई का जवाब गोलमोल तरीके से दिया वहीं केंद्रीय मंत्री के निर्देश के बावजूद अब तक मामले की जांच के लिए कोई कमेटी तक गठित नहीं की गई।

छले गए जायस के किसान
गांधी परिवार के राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ बहादुरपुर की जिस 1.0360 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा करने का आरोप लगा है वह 1982 में हुई चकबंदी के दौरान किसानों के खाते से कटौती कर विद्यालय के लिए आरक्षित हुई थी। बाद में यह भूमि सरकारी अभिलेखों में हेरफेर करके वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर के नाम दर्ज करा दी गई। वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर के नाम दर्ज इस भूमि पर बाद में राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट ने स्वयं सहायता समूह का प्रशिक्षण केंद्र चलाना शुरू कर दिया।
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