सुल्तानपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए चल रही आरक्षण प्रक्रिया में तकरीबन 90 फीसदी नवगठित ग्राम पंचायतें आरक्षण की जद में आएंगी। इसके बाद चक्रानुक्रम से वंचित ग्राम पंचायतों में जनसंख्या के हिसाब से छूटी ग्राम पंचायतों को आरक्षण में लिया जाएगा। डीएम कैंप कार्यालय में एडीओ पंचायतों के चार्ट के आधार पर तकरीबन आंकड़ा तैयार कर लिया गया है। इस बीच आरक्षण प्रक्रिया के बीच मनमाफिक सीट कराने के लिए धन वसूली की चर्चाएं आम हो गई हैं।
जिले में नवगठित 181 ग्राम पंचायतों में करीब 90 फीसदी ग्राम पंचायतें आरक्षण के दायरे में आने जा रही हैं। इन ग्राम पंचायतों में नए सिरे से इस बार चक्रानुक्रम व्यवस्था लागू की गई है। इसके बाद अभी तक वर्ष 1995 से आरक्षित नहीं होने वाली ग्राम पंचायतों को आरक्षण के दायरे में लाया जाएगा। आरक्षण के लिए जनसंख्या, रैपिड सर्वे का चक्रानुक्रम का आधार लिया जा रहा है। एडीओ पंचायतों द्वारा तैयार जनसंख्या, रैपिड सर्वे व चक्रानुक्रम चार्ट पंचायतराज विभाग को उपलब्ध कराया गया है। चार्ट के मुताबिक डीएम कैंप कार्यालय पर ग्राम प्रधान व बीडीसी के पदों का आरक्षण शुरू हो गया है। सूत्रों की मानें तो करीब आधा दर्जन ब्लॉकों की सूची बन गई है। इसके साथ ही जिला पंचायत सदस्यों की सीटों का चार्ट भी बन रहा है।
आरक्षण कार्य में हुई सेंधमारी
आरक्षण में गड़बड़ी रोकने के लिए प्रशासन की तरकीब भी काम नहीं आई। सूत्रों की मानें तो पंचायतराज कर्मियों के जरिए मनमाफिक सीटें कराने के लिए लोगों ने कैंप में भी सेंधमारी कर ली है। कुछ जगहों पर ग्राम पंचायतों को आरक्षित करने व नहीं आरक्षित करने दोनों के लिए सौदेबाजी हो गई है। एक ग्राम पंचायत में पिछले दिनों कई गांवों के दावेदारों का जमावड़ा लगा रहा। हालांकि इसे दबाने के कोशिशें की जा रही हैं लेकिन वसूली की चर्चाएं आम हैं। इस खेल की अफसरों तक को भनक नहीं है।