सुल्तानपुर। कोरोना महामारी के संक्रमण से बचाव के लिए किए गए लॉकडाउन व निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के आरोप में दर्ज मुकदमे की विवेचना करने में पुलिस की ओर से की गई लापरवाही से कोर्ट में विभाग की किरकिरी हुई है।
एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश पीके जयंत ने पुलिस की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इंकार करते हुए उसे लौटा दिया है। कोर्ट ने पुलिस की विवेचना पर सवाल उठाते हुए सीओ सिटी के पास केस डायरी व चार्जशीट भेजते हुए संज्ञान के विंदु पर सुनवाई के लिए 16 जुलाई की तिथि नियत की है। मामला बंधुआकलां थाने से जुड़ा है।
बंधुआकलां थाने में लॉकडाउन व निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के आरोप में दर्ज किए गए मुकदमें की विवेचना पूरी कर थाने में तैनात दरोगा अनूप कुमार सिंह ने चार्जशीट पिछले 10 मई को सीओ सिटी के पास भेजा था। सीओ सिटी ने इस चार्जशीट को पिछले 22 मई को कोर्ट में प्रस्तुत किया था।
पुलिस की चार्जशीट व केस डायरी के अनुसार विवेचक ने सिंकदर, जलील, जीशान, सलीम अंसारी व जमील को आरोपी बनाया गया है। उन्हें दंड प्रक्रिया संहिता के तहत दी जाने वाली नोटिस भी दी गई है लेकिन पुलिस ने नोटिस में कोई समय व स्थान नहीं भरा है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता मदन सिंह ने कहा कि विवेचक ने खाली नोटिस फार्म पर हस्ताक्षर कराकर कागजी खानापूर्ति की है। अन्य आरोपियों को नोटिस नहीं दी गई है और इसका विवरण भी दर्ज नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि विवेचक ने थाने में बैठकर यांत्रिक रूप से विवेचना की है और चार्जशीट दाखिल कर दी गई है।
कोर्ट ने पुलिस की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इंकार करते हुए विवेचक को आदेश दिया है कि वे सभी आरोपियों का घटना के संबंध में बयान दर्ज करें और तथ्यात्मक विवेचना करके चार्जशीट पेश करें। कोर्ट ने आदेश का अनुपालन करने के लिए चार्जशीट व केस डायरी सीओ सिटी के पास भेजने का आदेश दिया है। मामले में संज्ञान के बिंदु पर अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी।