सुल्तानपुर। आम तोड़ने को लेकर डेढ़ साल पहले शुरू हुए विवाद के इस अंजाम के बारे में को कोई सोच भी नहीं सकता था।
उस घटना के बाद रिश्ते में ऐसी दरार पड़ी कि मंगलवार को सगे भतीजों ने चाचा को गोलियों से भून डाला। इससे भी मन नहीं भरा तो कुल्हाड़ी से काटा। घटना के बाद गांव में कोहराम मचा है।
गोसाईगंज थाना क्षेत्र के नोखेपुर मजरे बहाउद्दीनपुर निवासी रामचंद्र तिवारी के तीन पुत्र थे। इनमें अरुण तिवारी, राकेश तिवारी और विनय तिवारी शामिल थे। अरुण तिवारी अपने परिवार को लेकर अलग रहते थे, जबकि राकेश तिवारी और विनय तिवारी एक साथ रहते थे।
डेढ़ वर्ष पूर्व आम के पेड़ से फल तोड़ने को लेकर अरुण तिवारी के बेटे शैलेंद्र तिवारी, सचेंद्र तिवारी से विनय तिवारी के बेटे अजय तिवारी व किशन तिवारी से कहासुनी के बाद मारपीट हुई थी।
मारपीट के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर पर केस दर्ज किया था। एक पक्ष से अरुण तिवारी और उनके बेटों शैलेंद्र व सचेंद्र के खिलाफ केस दर्ज किया गया था, जबकि दूसरे पक्ष की ओर से विनय तिवारी और उनके बेटे अजय व किशन के खिलाफ जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज हुआ था।
विनय तिवारी, अजय व किशन ने जमानत करा ली थी, जबकि अरुण तिवारी के बेटे शैलेंद्र व सचेंद्र ने जमानत नहीं कराई थी। दोनों घटना के बाद से ही फरार चल रहे थे। बाकायदा पुलिस ने शैलेंद्र और सचेंद्र की गिरफ्तारी के लिए इनाम भी घोषित किया था।
पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए शैलेंद्र और सचेंद्र ने गुजरात का रुख किया था। 22 जून 2019 को गुजरात में सचेंद्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पिछली छह जुलाई को परिवारीजनों ने सचेंद्र की तेरहवीं का कार्यक्रम भी किया था।
भाई के तेरहवीं संस्कार में भी शैलेंद्र नहीं पहुंचा। अरुण तिवारी की पत्नी सुशीला की मानें तो अजय तिवारी, किशन आदि के दहशत के कारण उनका बेटा शैलेंद्र कहां चला गया पता नहीं है।
नोखेपुर गांव में हुई नृशंस हत्या के बाद उमड़े ग्रामीणों के सामने अरुण की पत्नी सुशीला के मुंह से बार बार यही शब्द निकल रहे थे कि अब उनकी बेटी के हाथ कौन पीला करेगा।
पहले छोटे बेटे की मौत हुई फिर पति को भी मार डाला। बड़ा बेटा शैलेंद्र कहां और किस हाल में है किसी को नहीं मालूम। घर में अब बेटी गुड्डन ही बची है।