सुल्तानपुर। कोरोना वायरस को लेकर करीब ढाई माह के लॉकडाउन में लोगों का रोजगार ही नहीं छिना बल्कि उनकी जीवनधारा ही बदल गई। कुछ परदेसियों ने अपने-अपने क्षेत्र से हटकर रोजगार शुरू कर दिया। कोई सब्जी बेच रहा तो कोई भुट्टा। मुंबई में बिजली मैकेनिक का काम करने वाला एक व्यक्ति समोसे पर हाथ आजमा रहा है। हालांकि कुछ ऐसे भी प्रवासी हैं, जो परदेस जाने के इंतजार में हैं। कुछ परदेसियों की हाल बयां करती रिपोर्ट...
बिजली मिस्त्री बना रहा समोसा
कुड़वार विकासखंड क्षेत्र के रवनिया पश्चिम गांव का निवासी अज्जू यादव मुंबई में एक बिजली दुकान पर काम करता था। कोरोना को लेकर किए गए लॉकडाउन में काम बंद होने के बाद अज्जू घर आ गया। घर का खर्च चलाने की समस्या आई तो उसने गांव के चौराहे पर समोसे की दुकान खोल ली। उसका समोसा खाने वाले उसके इस हुनर का बखान कर रहे हैं।
सब्जियां पहुंच रहीं घर-घर
इसी गांव का दीपक यादव मुंबई में ही ऑटोरिक्शा चालक था। वह सवारियों को घर-घर पहुंचा रहा था। लेकिन लॉकडाउन में ऑटो बंद होने के बाद कोरोना के भय से वह गांव पहुंच गया। दीपक ने रोजगार के लिए गांव में अब सब्जी की दुकान खोल ली। अब उसकी सब्जियां घर-घर पहुंच रही हैं। सब्जी की दुकान से उसकी रोजीरोटी किसी तरह चल रही है।
टेलर लगा रहा ठेला
दिल्ली में कपड़ों की सिलाई करने वाला कुड़वार ग्राम पंचायत निवासी अशफाक भी लॉकडाउन में घर वापस आ गया। शहर की स्थिति को देखते हुए अशफाक ने वापस जाने का इरादा बदल दिया। अब वह ठेले पर सब्जी व फल बेच रहा है। बताता है कि सब्जी और फलों की बिक्री से उसके परिवार का खर्च चल रहा है।
पानी सप्लायर को भुट्टे का आसरा
चेन्नई में रहकर लोगों की प्यास बुझाने वाला मोतिगरपुर विकासखंड के पारसपट्टी निवासी रंजीत अब लोगों को भुट्टे का मजा चखा रहा है। रंजीत कई वर्ष से एक कंपनी में रहकर पानी की आपूर्ति घर-घर करता था। लॉकडाउन मेें काम बंद होने के बाद उसे लौटना पड़ा। वापस आने पर परिवार का खर्च चलाने के लिए रंजीत गांव के बाहर सुल्तानपुर-बलिया राजमार्ग पर भुट्टा बेचने लगा।